10 साल पहले बड़ागांव में हुई थी सतीश जायसवाल की हत्या, लाठी और फावड़े से हमले का था आरोप
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संवाद न्यूज एजेंसी वाराणसी। बड़ागांव थाना क्षेत्र में भूमि विवाद को लेकर सतीश कुमार जायसवाल की हत्या के मामले में मंगलवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट नंबर-3 प्रज्ञा सिंह की अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। अदालत ने शिवआसरे और अजीत कुमार जायसवाल को हत्या के मामले में आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया। वहीं, तीन अन्य दोषियों राजेंद्र जायसवाल, कृष्णआसरे और संतोष पटेल को भी विभिन्न धाराओं में कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। पैरवी एडीजीसी ओंकारनाथ तिवारी ने की। अभियोजन के अनुसार, 15 नवंबर 2016 को सुबह 10:30 बजे भूमि विवाद और पुरानी मुकदमे को लेकर चकखरावन, खरगपुर गांव में मारपीट हुई थी। आरोप था कि अजीत, राजेंद्र, संतोष पटेल, शिवआसरे और कृष्णआसरे लाठी-डंडे, गैंता और फावड़ा लेकर सतीश के पट्टीदार की जमीन पर पहुंचे। वहां सतीश के साथ मारपीट की गई। बीच-बचाव करने पहुंचे संदीप, रामप्रवेश और विकास कुमार समेत अन्य लोग भी घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल सतीश को हरहुआ के निजी अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर उसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने पांचों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए दंडित किया।
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हत्या में दो को उम्रकैद अदालत ने शिवआसरे और अजीत कुमार जायसवाल को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। दोनों को धारा 148 के तहत दो-दो वर्ष का कठोर कारावास और पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड भी दिया गया। अर्थदंड जमा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। मृतक के आश्रितों को मिलेगा अर्थदंड का 80 प्रतिशत अदालत ने अन्य दोषियों साढ़े तीन वर्ष और धारा 147 में एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। इन धाराओं में भी अर्थदंड लगाया गया है। आदेश के अनुसार, सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। वसूल किए गए अर्थदंड की 80 प्रतिशत राशि मृतक सतीश कुमार जायसवाल के आश्रित या विधिक प्रतिनिधि को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी। अदालत ने दोषियों को जिला कारागार भेजने का आदेश भी दिया।
कोर्ट में एक अभियुक्त ने 75 साल उम्र की दुहाई नहीं आई काम अभियुक्तों में शामिल राजेंद्र की तरफ से अदालत से गुहार लगाई कि उनकी उम्र 75 साल है ऐसे में कम सजा से दंडित किया जाए। अदालत ने माना अपराध के सापेक्ष जो सजा होगी वह मिलेगी। अपराध और सजा उम्र से तय नहीं होता। दो अन्य ने परिवार का भरण-पोषण करने वाला बताया, लेकिन कोर्ट ने अपराध, साक्ष्य गवाह के आधार पर सजा सुनाई।