बीमा पॉलिसी के नाम पर साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने आगरा से आरोपियों को गिरफ्तार किया। 45 हजार रुपये नकद बरामद किया गया।
बीमा पॉलिसी के नाम पर साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के सरगना समेत दो आरोपियों को साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने बुधवार को आगरा से गिरफ्तार किया। आरोपियों के कब्जे से आईफोन और 45 हजार रुपये नकद बरामद हुए हैं। सीजेएम कोर्ट ने आरोपियों को जेल भेज दिया।
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एसीपी साइबर क्राइम अपूर्व पांडेय ने बताया कि गिरोह के सरगना की पहचान आगरा के सिकंदरा स्थित बोदला की आवास विकास कॉलोनी निवासी रंजन कुमार के रूप में हुई है। दूसरा आरोपी आगरा के सिकंदरा स्थित केआर नगर की महर्षिपुरम कॉलोनी निवासी देवेश प्रताप सिंह उर्फ देवेश धाकरे है।
आरोपियों ने आठ जुलाई को वाराणसी निवासी पीड़ित को पीएनबी मेटलाइफ बीमा पॉलिसी पर अत्यधिक बोनस और मोटा लाभ दिलाने का झांसा दिया था। अलग-अलग तिथियों में विभिन्न बैंक खातों में कुल 11 लाख 72 हजार रुपये ट्रांसफर कराए। जांच और साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम ने आगरा और दिल्ली से इनपुट जुटाए। इसके बाद आगरा में दबिश देकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
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पुलिस की पूछताछ में दोनों ने बताया कि वे बीमा पॉलिसीधारकों को कॉल करते थे। खुद को बीमा कंपनी का कर्मचारी या अधिकारी बताकर पॉलिसी अपडेट करने, प्रीमियम भरने या भारी बोनस और लाभ दिलाने का झांसा देते थे। झांसे में आते ही वे पैसे अपने गिरोह द्वारा खुलवाए गए फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर करा लेते थे। इसके बाद इन पैसों को कई खातों में ट्रांसफर करके नकदी निकाल लेते थे।
बीमा ठगी के कई अन्य मामलों का भी पर्दाफाश होने की संभावना है। प्रभारी निरीक्षक उदयवीर सिंह, निरीक्षक विपिन कुमार और उपनिरीक्षक संजीव कनौजिया, गौतम कुमार, पृथ्वीराज सिंह, सूर्यभान सिंह व मुकेश कुमार ने आरोपियों को ट्रैक किया और आगरा में दबिश देकर गिरफ्तार किया।
क्या बोले अधिकारी
आरोपियों का पहले भी आपराधिक इतिहास रहा है। रंजन कुमार और देवेश प्रताप सिंह उर्फ देवेश धाकरे दोनों आगरा में दो बार जेल जा चुके हैं। फरीदाबाद और गुरुग्राम में दोनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हैं। इनके नेटवर्क के बारे में और जानकारी जुटाई जा रही है। -अपूर्व पांडेय, एसीपी साइबर क्राइम
बीमा पॉलिसी से जुड़े साइबर अपराध से कैसे बचें
एसीपी साइबर क्राइम ने बताया कि किसी भी अनजान नंबर से आए मैसेज, व्हाट्सएप लिंक या नो बटन (जो असल में एक एपीके फाइल होती है) पर क्लिक न करें। पॉलिसी रिन्यू करने या प्रीमियम भरने के लिए हमेशा बीमा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत एप का ही उपयोग करें। कोई भी बीमा एजेंट या कॉलर व्यक्तिगत बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने को कहे, तो उस पर भरोसा न करें। केवाईसी अपडेट करने या पॉलिसी लैप्स होने का डर दिखाकर मांगी गई ओटीपी, पिन या बैंक संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा न करें। यदि कोई भारी डिस्काउंट या मुफ्त हेल्थ इंश्योरेंस का ऑफर दे, तो सीधे कंपनी के दफ्तर या आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करके पुष्टि करें।
साइबर फ्रॉड होने पर क्या करें?
यदि आपके साथ कोई साइबर ठगी होती है, तो तुरंत नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। यदि आपने ऑनलाइन धोखाधड़ी और डेटा चोरी से बचाव के लिए कोई साइबर इंश्योरेंस पॉलिसी ले रखी है, तो उसकी शर्तों के अनुसार नुकसान की भरपाई के लिए कंपनी से संपर्क करें।