एक लाख रुपये मिला था, एक लाख मिलना शेष था
लंका थानाध्यक्ष शिवाकांत मिश्र के अनुसार पूछताछ में मनीष ने बताया कि पटना का सॉल्वर गैंग उससे संपर्क किया था। परीक्षा देने के लिए उसके खाते में एक लाख रुपये एडवांस दिया गया था। एक लाख रुपये और उसे रिजल्ट आने पर मिलता। सौरभ ने यह भी बताया कि उसे परीक्षा दिलाने आया आशीष रंजन भी सॉल्वर गिरोह से ही जुड़ा है।
लंका थानाध्यक्ष ने कहा कि मूल अभ्यर्थी और इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की दो टीम गठित की गई है। पूरी उम्मीद है कि सभी आरोपी जल्द ही पुलिस की गिरफ्त में होंगे।