गंगा को निर्मल एवं अविरल बनाने के लिए जलीय जीव जंतुओं को संरक्षित कर गंगा की सफाई में उनकी भी मदद ली जाएगी। इसके तहत सारनाथ में बने कछुआ प्रजनन केंद्र को विस्तार देकर अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की कवायद तेज हो गई है।
काशी की कछुआ सेंक्च्युरी क्षेत्र में कछुओं के साथ दूसरे जलीय जीवों को छोड़ने की तैयारी है। योजना पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा। इसके लिए प्रजनन केंद्र में एक हजार अंडे मंगाए गए हैं। उन्हें तैयार कर गंगा में छोड़ा जाएगा।
वाराणसी में राजघाट से रामनगर तक तकरीबन सात किमी लंबी कछुआ सेंक्च्युरी है। नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा (एनएमसीजी) की नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा में सीवेज रोकने, नालों को बंद करने के लिए काम हो रहे हैं।
साथ ही जलीय जीवों के संरक्षण पर भी नमामि गंगे और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने काम करना शुरू कर दिया है। फरवरी में एनएमसीजी के डाइरेक्टर जनरल यूपी सिंह और फारेस्ट वाइल्ड लाइफ के चीफ कंजरवेटर एसके अवस्थी ने जीव विज्ञानियों के साथ सारनाथ कछुआ सेंटर का निरीक्षण किया था।
इस क्त्रस्म में काशी वन्य जीव प्रभाग ने प्रजनन केंद्र पर अंडे मंगाने के साथ ही जमीन की तलाश शुरू हो गई है। सेंटर के विस्तार का प्रोजेक्ट बनाया जा रहा है। सेंटर का विस्तार कर कछुओं, डाल्फिन एवं दूसरी मछलियों एवं जलीय जीवों को संरक्षित किया जाएगा। समय-समय पर इन्हें गंगा में छोड़ा जाएगा।