उद्यमियों का कहना है कि 50 प्रतिशत के दमनकारी शुल्क के कारण कई कारखाने बंद होने की कगार पर थे और लाखों कारीगर बेरोजगार हो गए थे। अब डील फाइनल होने के बाद निर्यात की राह आसान हुई है।
कृषि यंत्र निर्यातक राजेश सिंह बताते हैं कि वहां के खरीदारों से फिर से बातचीत की जा रही है। संभावना है कि ठप पड़े उद्योगों को फिर से पंख लगेंगे। पूर्वांचल निर्यातक संघ के अध्यक्ष रघु मेहरा का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अब भी 18 प्रतिशत तक टैरिफ का प्रभाव उद्योगों पर पड़ रहा है। हालांकि अब के फैसले से भी काफी हद तक राहत मिलेगी।
उद्यमियों का कहना है कि 50 प्रतिशत के दमनकारी शुल्क के कारण कई कारखाने बंद होने की कगार पर थे और लाखों कारीगर बेरोजगार हो गए थे। अब डील फाइनल होने के बाद निर्यात की राह आसान हुई है। कृषि यंत्र निर्यातक राजेश सिंह बताते हैं कि पूर्वांचल से अमेरिका में निर्यात की चैन टूट गई है। वहां के खरीदारों से फिर से बातचीत की जा रही है। संभावना है कि ठप पड़े उद्योगों को फिर से पंख लगेंगे। अमेरिका से नए ऑर्डर मिलने की प्रबल संभावना है, जिससे बेरोजगार हो चुके कारीगरों को दोबारा काम पर बुलाया जा सकेगा।
इन उद्योगों पर सकारात्मक प्रभाव
- भदोही और मिर्जापुर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले इस उद्योग का 60% निर्यात अमेरिका को होता है।
- बनारसी साड़ियां, चादरें, कुशन कवर, और जरी-जरदोजी के काम को नया बाजार मिलेगा।
- निर्यातकों का कहना है कि टूटी हुई सप्लाई चेन को फिर से जोड़ने के लिए विदेशी खरीदारों से बातचीत शुरू हो गई है।