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डंपिंग ग्राउंड बनने से असि किनारे मुसीबत

Sun, 01 May 2016 02:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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नगवा क्षेत्र से बहता नाला जो कभी असि नदी था, आज अतिक्रमण की जद में है।
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असि नदी का तट मुसीबतों का डेरा बन गया है। अतिक्रमण और अवजल के बोझ से कराहती नदी की पीड़ा न प्रशासन सुन रहा है न उसके तट पर रहने वाले लोग। प्राकृतिक संसाधन से खिलवाड़ जनता और अफसर दोनों के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। एक तरफ जहां नदी के तट पर रहने वाले लाखों लोगों के रातों की नींद और दिन का चैन गायब होता जा रहा है, वहीं अगर जांच हुई तो असि को बर्बाद करने वाले कई विभागों के अफसरों का गला फंस सकता है।
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जन संगठनों के शोर और जनता के आंदोलन की राह पकड़ने के बावजूद असि नदी को कूड़े से पाटा जा रहा है। तट पर बसे लोग तो घरों का कूड़ा फेंक ही रहे हैं, नगर निगम के सफाई कर्मचारियों ने भी इसे डंपिंग ग्राउंड के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। रामानुज नगर कॉलोनी, सहोदरवीर पुल, रवींद्रपुरी पुलिया, साकेतनगर, ब्रह्मानंद नगर समेत करीब दो सौ से अधिक स्थानों पर नदी की तलहटी में कूड़ा पाटा जा रहा है। कई जगह नदी को पाट कर स्कूल, अस्पताल, भवन बनाए जा रहे हैं। रवींद्रपुरी पुलिया के पास नदी के बड़े हिस्से को पाट कर वहां बाड़ लगाई जा रही हैं।



गंगा रक्षा आंदोलन के अध्यक्ष कपींद्र तिवारी कहते हैं कि नगर निगम ने स्थाई तौर पर कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था न कर नदी की व्यवस्था को 30 वर्षों से लगातार नष्ट कर रहा है। असि नदी को सबसे अधिक नुकसान नगर निगम के कूड़े की वजह से हो रहा है। असि-गंगा संगम को भी नगर निगम के अधिकारियों ने कूड़े से ही पटवा दिया। प्रोजेक्टीस संस्था के अध्यक्ष जगन्नाथ ओझा, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के महामंत्री नीरज पांडेय का कहना है कि सबसे पहले निगम को नदी में कूड़ा गिराने पर रोक लगानी चाहिए। इसके साथ ही नालों का नदी में बहाया जाना बंद किया जाना चाहिए। ऐसा नहीं हुआ तो जनता इसके विरोध में सड़कों पर उतरेगी।   
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