गंगा महोत्सव में उत्तर वाहिनी का किनारा और शास्त्रीय संगीत की स्वर लहरियों का संगम हर किसी को अभिभूत कर गया। शनिवार को चार दिवसीय गंगा व देव दीपावली महोत्सव का समापन हुआ। कलाकारों ने शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियों से देर रात तक सुमधुर गीत-संगीत की सुरसरिता को प्रवाहमान किया। गायन, वादन और नृत्य की त्रिवेणी सदानीरा के तट पर बहती रही। गंगा महोत्सव की अंतिम निशा की पहली प्रस्तुति पद्मश्री डॉ. सोमा घोष की रही। उन्होंने गंगा नमन के बाद शिव गंगा किनारे नाच रहे हैं....से शुरुआत की। रघुपति राघव राजा राम के बाद तेरे रंग में तेरे रंग में रंग गई तेरे रंग...से समापन किया। तबले पर ललित कुमार, हारमोनियम पर पं. पंकज कुमार मिश्र और कीबोर्ड पर संतोष कुमार मौर्य ने संगत की। इसके बाद सितार वादक डॉ. सुप्रिया शाह ने मंच पर राग बागेश्वरी में आलाप, जोड़, झाला और बंदिश की अवतारणा की। कथक नृत्यांगना डॉ. ममता टंडन ने भगवान शंकर की आराधना, विश्वनाथाष्टकम, मां गंगा के गीत पर मनोहारी प्रस्तुति दी। तबले पर प्रीतम मिश्रा व उदयशंकर, गायन व हारमोनियम पर आनंद किशोर मिश्रा, सितार पर नीतेश मिश्रा एवं बोल पढ़ंत मांडवी सिंह ने किया। इसके बाद पल्लवी पांडेय ने गंगा स्तुति, शिव भजन और दादरा में कब्बो कंगना कटार बन जाला...की प्रस्तुति दी। हारमोनियम पर गौरव मिश्र, तबले पर मंगला प्रसाद मिश्र, पैड पर राज सोनी और आर्गन पर आशीष ने संगत की। इसके अलावा गणेश पाठक, रंजना राय, राजन तिवारी, अमलेश शुक्ला, आस्था शुक्ला ने एक के बाद एक गायन की प्रस्तुतियां दीं। अमरेंद्र मिश्र ने सितार वादन, नवीन गुज्जर (यूपी रॉक बैंड) और अंत में अभिषेक महाराज ने सितार वादन की प्रस्तुति दी। समापन कार्यक्रम में राजघाट से अस्सी घाट तक साफ सफाई करने वाले और रखरखाव करने वालों को राज्य मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने साफा पहनाकर सम्मानित किया।