पेड़ बोल- हम धरा पर जीवन देने आए हैं लेकिन हमें ही काटा जा रहा है।
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इन्हीं इंसानों के पूर्वज हमारी पूजा करते थे, जब तक हम पूजे गए, तब तक ऑक्सीजन के लिए पैसा नहीं देना पड़ा। बंद करो आरी का वार, नहीं सहेंगे अत्याचार। कटहल गुप्ता, बरगद सिंह, जामुन चौबे ने कह दिया कि अब जंगल खत्म कर रहे हो तो गांवों और मुहल्लों में तो रहने दो।
संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव ने कहा कि वृक्ष यूनियन के माध्यम से पेड़ों के दर्द को उजागर किया जाएगा। ये पेड़-पौधे हमारे परिवार व जीवन का हिस्सा हैं। इनको अलग करना मतलब अपने जिंदगी से खिलवाड़ करना है। पौधा न लगाओ, लेकिन काटो तो मत। पूर्वजों के रास्तों पर चलकर हम पृथ्वी और पर्यावरण की रक्षा कर सकते है।
संस्थान की राष्ट्रीय महासचिव डॉ. अर्चना भारतवंशी ने कहा कि पेड़ अपने होने का एहसास करा रहे हैं। पड़ों से ही मानव जीवन बचा है। इनको भी अपने परिवार का हिस्सा बनाये। इस अनोखे मार्च में डॉ. नजमा परवीन, ज्ञान प्रकाश, सत्यम राय, संजय भारद्वाज, अमित राजभर, सत्यम सिंह, अंकित राय, रीता, माया, पार्वती, लक्ष्मीना, मैना, सुनीता, अर्चना, धनेसरा, ममता, सरोज, अंजू, विद्या, इली भारतवंशी, उजाला भारतवंशी, दक्षिता भारतवंशी, पौरवी, शिखा, रिया, आकांक्षा आदि लोग शामिल हुए।