वाराणसी नगर निगम के परिवहन विभाग में हुए घोटाले के मामले में अपर नगर आयुक्त देवीदयाल ने ब्लैकलिस्टेड चार फर्मों के खिलाफ एफआईआर के लिए सिगरा थाने में दो बार तहरीर भेजी। शुक्रवार को जो तहरीर दी गई, उसमें फर्म के नाम में गलती थी। इसके कारण सिगरा थाने ने वापस कर दिया। बाद में दोबारा नाम को सुधार कर तहरीर भेजी गई। शुक्रवार रात 12 बजे तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी।
नेशनल इलेक्ट्रिक, यूनाईटेड सेल एंड कंपनी, एलाइड इन कार्पोरेशन, मनीष आटो सेल्स फर्म पर आरोप है कि साल भर में केवल नगर निगम से ही कमाई की है। इस बारे में इंस्पेक्टर सिगरा आशुतोष ओझा ने कहा कि जो तहरीर भेजी गई थी, उसमें तथ्यात्मक त्रुटियां थीं। इसके चलते तहरीर वापस लौटाई गई। अपर नगर आयुक्त देवीदयाल ने बताया कि तहरीर सुधारकर भेज दी गई है।
वहीं पार्षदों ने आरोप लगाया कि पहले तो कार्रवाई करने का दिखावा करते हैं। बाद में गलत तहरीर भेजते हैं ताकि फर्म को बचा लिया जाए। परिवहन की तरह नजारत, सामान्य विभाग की भी जांच हो तो करोड़ों के घोटाले सामने आएंगे। हाथी के दांत दिखाने के अलग और खाने के अलग होते हैं। फर्म का पूरे साल का टर्नओवर नगर निगम से लिए गए धन के बराबर है।
गाड़ियों की रिपेयरिंग और पार्ट्स से संबंधित 10 फर्म पर नगर आयुक्त ने कार्रवाई की थी। सभी को ब्लैक लिस्ट किया गया है। जांच के दायरे में 17 फर्में थीं। सात फर्म ऐसी हैं, जो पंजाब व अन्य शहरों में हैं। चार ऐसी फर्म हैं, जिनका एक ही पता है।