वाराणसी जिले में सिकमी किरायेदारों के नाम हस्तांतरण की प्रक्रिया 13 साल से लंबित है। पूर्व में नगर निगम में एक प्रस्ताव लाया गया था, जिसके तहत यह फैसला लिया गया था कि सिकमी किरायेदारों से निर्धारित फीस, किराया आदि वसूलकर इन्हें वैध किया जाए। इस पर पार्षदों के बीच सहमति भी बन गई थी, लेकिन निगम की ओर से इसे फाइनल नहीं किया गया।
पूर्व में निगम ने दुकानों का सर्वे कराकर 150 से अधिक मूल आवंटियों को नोटिस भेजा था। बावजूद इसके, इन पर कार्रवाई नहीं की गई। सूत्रों के अनुसार, निगम एक तरफ तो दुकानों को अपने नाम पर अलॉट कराकर दूसरों को किराये पर देने वाले आवंटियों के खिलाफ हर साल नोटिस भेजने की कार्रवाई करता है। मगर दूसरी तरफ, आवंटन रद्द करने के नाम पर सालभर के लिए मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है।
रविंद्र सहाय, विकास कुमार और विनोद ने कहा कि 2012 में निगम की ओर से बेदखली नोटिस जारी किया गया था। बाद में तय हुआ कि एक निश्चित धनराशि जमा करने पर सिकमी किरायेदारों को नियमित किया जाएगा। निगम के एक अधिकारी ने बताया कि पहले यह मामला उठा था। इस पर शासन की गाइडलाइन आने पर ही कुछ होगा।
क्या बोले अधिकारी
गर्मी में लोगों को बेहतर आपूर्ति मिलती रहे, इसके लिए उपकेंद्रवार तारों से सट रही पेड़ों की डालियां छंटवाने के साथ ही ट्रांसफॉर्मर, तार मरम्मत का काम भी चल रहा है। जहां भी फॉल्ट की सूचना मिल रही है वहां संबंधित अधिकारियों को तुरंत समस्या का समाधान करवाने को कहा गया है।
-राकेश कुमार, मुख्य अभियंता