टीम सदस्यों के अनुसार, चाइनीज रेलवे कंस्ट्रक्शन कंपनी सहित विभिन्न जानकारों ने बताया कि कैसे चीन ने हाई स्पीड ट्रेन के नेटवर्क को बढ़ाया। वहां पहले दो शहरों के बीच छोटे-छोटे ट्रैक का निर्माण हुआ और बाद में उन्हें जोड़ दिया गया। यह भी बताया कि रात में हाई स्पीड ट्रेनों का संचालन बंद होने के बाद किस तरह से वह ट्रैक को मेंटेन करते हैं।
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अधिकारियों के अनुसार, प्रशिक्षण से यह तो स्पष्ट हो गया कि अहमदाबाद और मुंबई के बीच प्रस्तावित हाई स्पीड ट्रेन की रेल लाइन डेडिकेटेड लाइन होगी। इस पर स्लो स्पीड ट्रेन नहीं चलेगी। रेलवे स्टेशनों पर एयरपोर्ट की तर्ज पर दोहरी जांच व्यवस्था, अंडरग्राउंड या एलिवेटेड ट्रैक, फेसिंग वाले ट्रैक के बारे में बताया गया।
प्रशिक्षण में पूर्वोत्तर रेलवे वाराणसी मंडल के वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी मोहित वर्मा, वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर मनोज सिंह, उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर कैरेज एंड वेगन कौस्तुभमणि पांडेय, वरिष्ठ मंडल वित्त प्रबंधक ओपी यादव भी मौजूद रहे। बताते चलें कि वाराणसी-आगरा सहित कई रूटों पर हाई स्पीड ट्रेन चलाने का प्रस्ताव है।