वाराणसी। डीजल लोकोमोटिव वर्क्स डीएलडब्ल्यू का नाम बदलकर बनारस लोकोमोटिव वर्क्स किए जाने को लेकर डीरेकाकर्मियों में उत्साह है। कर्मचारियों के अनुसार डीरेका के इंजन विश्व भर में जाते हैं। हर साल डीरेका से इंजन का निर्यात विदेशों में होता है। जिस पर मेड इन डीएलडब्ल्यू लिखा होता है। अब उस पर बीएलडब्ल्यू लिखा होगा। जिससे विश्व भर में बनारस का नाम पढ़ा जाएगा। यह बड़ी उपलब्धि बनारस को मिली है। वहीं डीरेका के बजाय बनारस का नाम काफी प्रभाव भी छोड़ेगा। किसी को बताने की जरूरत अब नहीं रह जाएगी। रेल मंत्रालय का यह फैसला स्वागत योग्य है।
160 इंजनों का विदेशों में हुआ है निर्यात
पूर्व डीरेका से विदेश में लोको मोटिव का निर्यात पहली बार जनवरी 1976 में तंजानिया को किया गया था। इसके बाद
डीरेका ने 1995 से लगातार इंजन की आपूर्ति विदेशों में करनी शुरू की। श्रीलंका, सेनेगल, माली, अंगोला, म्यामांर, तंजानिया, वियतनाम, बांग्लादेश, मलेशिया, मोजाम्बिक, सूडान आदि देशों को डीरेका ने इंजन का निर्यात किया है। अब तक 160 इंजन का निर्यात किया जा चुका है।
यह बड़ी उपलब्धि बनारस के खाते में दर्ज हुई है। पिछले कई साल से डीजल इंजन का उत्पादन कम हो गया था और पिछले सत्र से उत्पादन लगभग ठप भी था। सिर्फ इलेक्ट्रिकल इंजन तैयार हो रहे हैं।-सुशील सिंह, सदस्य, कर्मचारी परिषद
अब विश्व भर में बनारस नाम छाया रहेगा। कारण कि विदेशों में निर्यात होने वाले इंजन पर अब डीएलडब्ल्यू नहीं बल्कि बीएलडब्ल्यू लिखा होगा। यह गर्व वाली बात रहेगी। हर कोई बनारस को जान सकेगा।--धर्मेन्द्र सिंह, सदस्य, कर्मचारी परिषद
डीएलडब्ल्यू का नाम बीएलडब्ल्यू किया जाना स्वागत योग्य उचित कदम है। बनारस पौराणिक सांस्कृतिक नगरी है। इसलिए इसका नामकरण बनारस के पौराणिक महत्व को बढ़ाता है। जेपी तिवारी, भूतपूर्व वरिष्ठ लेखा अधिकारी डीरेका