वाराणसी। शहर में नो एंट्री में भी पुलिस की मिलीभगत से भारी मालवाहकों की आवाजाही धड़ल्ले से जारी रहती है। इसी के चलते बृहस्पतिवार को बीएचयू अस्पताल के छोटे गेट के समीप ट्रक की टक्कर से बाइक सवार एक मेडिकल ऑफिसर की मौत हो गई थी। इस हादसे से भी पुलिस चेतेगी या नहीं, आगामी दिनों में यह देखने लायक बात होगी।
शहर में रोजाना रात में नो एंट्री खुलते ही मालवाहकों की रफ्तार तेजी से बढ़ जाती है। कुछ शहर से जल्दबाजी में निकलने को होते हैं तो कुछ दूसरे जनपदों को जाने वाले वाहन होते हैं। इसके बाद भी पुलिस की मिलीभगत से शहर में नो एंट्री के दौरान भी वाहनों की आवाजाही जारी रहती है। नो एंट्री में रोहनिया, लंका, शिवपुर, मंडुवाडीह और कैंट थाने की पुलिस की मिलीभगत से भारी मालवाहक शहर में आते हैं। जानकार बताते हैं कि इसके लिए पुलिस पिकेट और चौराहों पर तैनात सिपाही प्रति मालवाहक 200 से 500 रुपये वसूलते हैं और आए दिन कहीं न कहीं हादसा होता रहता है। इस संबंध में एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने कहा कि नो एंट्री में आवश्यक वस्तुओं से जुड़े वाहनों के अलावा यदि कहीं कोई मालवाहक दिखा तो संबंधित क्षेत्र के थानेदार, चौकी प्रभारी और आरक्षी विभागीय कार्रवाई की जद में आएंगे। थानेदार और चौकी प्रभारी यह सुनिश्चित करें कि नो एंट्री के दौरान कोई मालवाहक उनके क्षेत्र में न आए।