नोटबंदी का सबसे बड़ा असर अब देखने को मिलेगा। राज्य कर्मचारियों और पेंशनधारकों के खाते में एक दिसंबर को करीब तीन अरब रुपये जमा होने हैं। महीने भर से तंगी झेल रहे वेतनभोेगी सैलरी आने के बाद बैंकों की ओर दौड़ेंगे। पहले से ही कैश की समस्या से जूझ रहे बैंकों के सामने अब बड़ा संकट आ गया है। कैश का प्रबंध करने के साथ ही उसे वेतनभोगियों में वितरित करना एक बड़ी समस्या है। पैसे निकालने के लिए लोगों की लंबी लाइन लगेगी।
कोषागार कार्यालय के मुताबिक वाराणसी जिले में करीब 117 सरकारी विभागों में काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारियों के खाते में महीने की पहली तारीख को सैलरी भेज दी जाती है। वहीं वाराणसी में रहने वाले करीब 26 हजार पेंशनधारकों के खाते में भी पहली तारीख को ही पैसा भेजा जाता है। सभी कागजात पूरे कर लोगों के खातों में पैसा भिजवाने की जिम्मेदारी कोषागार कार्यालय की होती है। विभाग की मानें तो वेतनभोगियों और पेंशनधारकों के खाते में हर महीने 3080409779 रुपये जमा कराए जाते हैं।
सारी प्रक्रिया पूरी कर 30 और 31 तारीख की मध्य रात्रि में ही बैंकों के जरिए लोगों के खातों में पैसा भेज दिया जाता है। नवंबर माह की सैलरी के लिए सभी कागजी कार्यवाही पूरी कर बैंकों से लोगों के खातों में पैसा भेजने को कह दिया गया है। एक दिसंबर को लोगों के खातों में पैसे पहुंच जाने चाहिए। अब बैंकों को प्रबंध करना है कि वह किस प्रकार पैसे का प्रबंध करें। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारकों को स्टेट बैंक और इलाहाबाद बैंकों के जरिए वेतन ओर पेंशन दी जाती है। कोषाधिकारी सुधांशु कुमार का कहना है कि सभी विभाग महीने के अंत में बिल बनाकर कोषागार भेजते हैं। रिपोर्ट के आधार पर लोगों के खातों में एक तारीख को पैसा भेजा जाता है।