पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया था कि हेरोइन की खेप गाजीपुर निवासी मनोज दुबे उर्फ नेता उर्फ पंडित को सौंपी जानी थी। जांच के दौरान कई संदिग्ध ड्रग तस्करों के फोन नंबर और पते भी बरामद हुए थे। आरोपियों ने यह भी बताया था कि खेप की डिलीवरी के एवज में उन्हें प्रति किलोग्राम 10 हजार रुपये कमीशन मिलने वाला था।
जांच में सामने आया कि इस पूरे तस्करी नेटवर्क का मास्टरमाइंड जमील अहमद था, जो वाराणसी के गिरजाघर चौराहे के पास किराये के मकान में रहता था। वह राजस्थान के सप्लायर विजय सिंह से हेरोइन खरीदकर पूर्वांचल में इसकी आपूर्ति करता था।
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही एनडीपीएस एक्ट के तहत अन्य दंडात्मक आदेश भी पारित किए।