केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सुरक्षातंत्र को ‘पीपुल्स फ्रेंडली’ बनाने की कोशिश जारी है। इसके लिए समय-समय पर सुरक्षाकर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है। कहा कि हम ऐसा सुरक्षातंत्र तैयार करना चाहते हैं जिसे देखने के बाद आम आदमी के जेहन में विश्वास पैदा हो न कि भय। पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों के खिलाफ स्थानीय लोगों की नाराजगी से जुड़े सवाल के जवाब में गृहमंत्री ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों की छवि को धूमिल करने वालों को बाज आना चाहिए। सुरक्षा के लिए जो भी संभव है वहां सरकार कर रही है।
शनिवार की देर शाम यहां सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सुरक्षा बेहद संवेदनशील मामला है। इसकों राजनीतिक नफा नुकसान के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। कहा कि आम लोगों की भी जिम्मेदारी है कि वह सेना का मनोबल बढ़ाए। प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र में इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम (एकीकृत सुरक्षा व्यवस्था) से जुड़े सवाल पर गृहमंत्री ने कहा कि कानून व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त रखना प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है। रहा सवाल एकीकृत सुरक्षा व्यवस्था का तो प्रदेश सरकार की जो भी अपेक्षा होगी, केंद्र उसे हर हाल में पूरा करेगा। सुरक्षा इंतजामों को दुरुस्त करने के लिए पैसे की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी।
उत्तराखंड मामले में कोर्ट के फैसले का इंतजार
उत्तराखंड के राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़े सवालों पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना होगा। कोर्ट का जो भी फैसला होगा हमें मान्य होगा। पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन से जुड़े सवाल पर गृहमंत्री ने कहा कि असम में सरकार बनाने को लेकर हम आश्वस्त हैं बाकी जगहों पर भाजपा का प्रदर्शन अच्छा होगा। अंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में सारनाथ में रविवार को आयोजित धम्म चक्र यात्रा में शामिल होने के सवाल पर राजनाथ ने कहा कि भाजपा शुरू से ही बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती सामाजिक समरसता दिवस के रूप में मनाती रही है। यह कोई पहला मौका नहीं है जब मैं ऐसे कार्यक्रमों में शामिल हो रहा हूं।
मोदी की तारीफ की
गृहमंत्री शनिवार को प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में थे। सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में राजनाथ ने पीएम मोदी की जमकर तारीफ की। कहा कि मोदी काल्पनिक क्षमता के धनी इंसान हैं। थकने वाले पीएम नहीं हैं मोदी। एक दिन में तीन-चार बड़े कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद भी अगले दिन की सुबह उनकी पूरी ऊर्जा के साथ होती है।