गणेश चतुर्थी की तैयारी पूरी कर ली गई है। आज यानि बुधवार को पंडालो में गजानन की प्रतिमाएं विराजेगी। करीब एक सप्ताह से 10 दिन तक चलने वाला गणेश चतुर्थी पर्व बुधवार को शुरू हो जाएगा। जिसको लेकर युवाओं में खासा उत्साह है। वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों ज्ञानपुर, गोपीगंज, भदोही, खमरिया, सुरियावां सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में पंडाल भी बनाए गए हैं। मंगलवार शाम को कई जगहों पर प्रतिमा लेकर युवा पंडाल पर पहुंचे। गणपति बप्पा मोरिया का भक्त जयकारा लगा रहे थे। बुधवार से मंदिरों और पंडालों में विधि विधान से पूजन शुरू हो जाएगा।
गणेश चतुर्थी
- फोटो : अमर उजाला
मान्यता है कि भाद्रपद माह के शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि पर विध्नहर्ता और मंगलमूर्ति भगवान गणेश का जन्म हुआ था। इसी कारण से सभी चतुर्थी में इसका विशेष स्थान है। इस बार की भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की गणेश चतुर्थी बहुत ही खास और शुभ फल देने वाली है। 300 साल बाद गणेश चतुर्थी पर दुर्लभ संयोग बना रहा है। दरअसल इस बार गणेश चतुर्थी तिथि पर वही शुभ योग और संयोग बना हुआ है जो गणेशजी के जन्म के समय बना था। भगवान गणेश का जन्म बुधवार के दिन, चतुर्थी तिथि, चित्रा नक्षत्र और मध्याह्र काल में हुआ था। इसके अलावा 31 अगस्त से 9 सितंबर तक गणेश उत्सव के बीच कई शुभ और मंगलकारी शुभ योग बनेगा।
गणेश चतुर्थी
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भक्त अपने-अपने तरीके से गणेश उत्सव मनाने के लिए तैयारी में जुट चुके है। गणेश उत्सव को लेकर कलाकारों ने दो से पांच फुट तक की मूर्ति तैयार की है। इसकी कीमत 600 से लेकर छह हजार तक है। मूर्ति का अंतिम रूप दे रहे भदोही के रावपुर निवासी मूर्तिकार क्रिस्टो पाल का कहना है कि गणपति पूजा के चार माह पहले से ही मूर्तियां तैयार होने लगती है। मूर्ति तैयार करने की सामग्री काफी महंगी है। इसकी वजह से मूर्तियों की उचित कीमत रखी गई है। मूर्ति को तैयार करने में लाल, पीला, हरा, काला व सफेद रंग का इस्तेमाल किया जाता है।