पित्ताशय के कैंसर वाले मरीजों के ठीक होने की दर भी 10-20 प्रतिशत ही है। प्रो. मनोज ने बताय कि पित्ताशय के कैंसर के ड्राइवर म्यूटेशन की पहचान पहली बार की गई है, जिससे इस संबंध में लंबे समय से चल रही कश्मकश का काफी हद तक समाधान भी मिल पाया है। यह अध्ययन पित्ताशय के कैंसर के उपचार में एवरोलीमस, टेमसिरोलीमस दवाओं के इस्तेमाल की राह दिखाता है।
सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग के प्रो. मनोज पांडेय के अनुसार बीएचयू में पिछले 25 वर्षों से कैंसर पर शोध हो रहा है, जिसमें इसके कारकों का पता लगाने पर अध्ययन किया जा रहा है। हेवी मेटल और टाइफॉइड कैरियर को भी इस कैंसर के कारकों में माना जाता है। इस बार टीम ने पित्त की थैली के कैंसर के ड्राइवर म्यूटेशन को खोज निकाला है। शोध टीम में डॉ. सत्यविजय चिगुरुपति, डॉ. रोली पुरवर, मोनिका राजपूत, डॉ. मृदुला शुक्ला शामिल हैं।