हिंदू पक्ष ने दावा किया कि ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग है।
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जिला जज की अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए 14 अक्तूबर 2022 को हिंदू पक्ष की मांग खारिज कर दी थी। जिला जज की अदालत ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने 17 मई 2022 के अपने आदेश में कहा था कि सर्वे में मिली शिवलिंग जैसी आकृति को सुरक्षित और संरक्षित रखा जाए। कार्बन डेटिंग या जीपीआर तकनीक का प्रयोग करने से शिवलिंग जैसी आकृति को क्षति पहुंचेगी तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन होगा।
जिला जज की अदालत के आदेश के खिलाफ हिंदू पक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की। बीते 12 मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिवलिंग जैसी आकृति की वैज्ञानिक पद्धति से जांच का आदेश भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को दिया। हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। अब सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक सर्वे पर रोक लगा दी।
ज्ञानवापी परिसर के जीपीआर तकनीक से एएसआई के सर्वे पर वर्ष 2021 में इलाहाबाद हाईकोर्ट भी रोक लगा चुका है। इस मामले में हाईकोर्ट का आदेश फिलहाल सुरक्षित है। दरअसल, वर्ष 1991 में प्राचीन मूर्ति स्वंभू ज्योतिर्लिंग भगवान विश्वेश्वर मुकदमा दाखिल किया गया था।
वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने जिला अदालत में प्रार्थना पत्र देकर ज्ञानवापी परिसर का सर्वेक्षण जीपीआर तकनीक से कराने की मांग की थी। आठ अप्रैल 2021 को जिला अदालत ने सर्वे का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की। इस पर हाईकोर्ट ने सितंबर 2021 में ज्ञानवापी परिसर के सर्वे पर रोक लगा दी थी।