निरीक्षण के बाद काशी विद्वत परिषद के विद्वान
- फोटो : amar ujala
काशी विश्वनाथ धाम में पड़ने वाले काशी खंडोक्त मंदिरों का स्थान परिवर्तन नहीं किया जाएगा। मंदिरों का उनके स्थान पर ही सुंदरीकरण किया जाएगा। इसके साथ ही अंतरगृही और पंचक्रोशी यात्रा वाले मंदिरों को भी उसी स्थान पर संरक्षित किया जाएगा।
अंतरगृही गैलरी के मार्ग से श्रद्धालु काशी खंडोक्त, पंचक्रोशी और अंतरगृही यात्रा के मंदिरों का दर्शन कर सकेंगे। यह निर्णय रविवार को काशी विद्वत परिषद के विद्वानों ने कारिडोर के मंदिरों और देव विग्रहों के निरीक्षण के बाद लिया।
रविवार को प्रो. रामनरायण द्विवेदी के साथ काशी विद्वत परिषद के विद्वानों ने काशी विश्वनाथ धाम क्षेत्र का निरीक्षण किया। उन्होंने काशी खंडोक्त, पंचक्रोशी, अंतरगृही और प्रसिद्ध व पूजित मंदिरों का क्रमश: निरीक्षण किया।
kashi vishwanath corridor
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संयोजक प्रो. द्विवेदी ने मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह को आश्वस्त किया कि अंतरगृही गैलरी यात्रा के लिए दो विद्वानों का दल और मंदिर प्रशासन की ओर से आर्कि टेक्ट तथा कैमरामैन के साथ काशी खंडोक्त मंदिराें का नक्शा तैयार किया जाएगा।
इसके अनुसार अंतरगृही गैलरी यात्रा का निर्माण किया जाएगा। भवनों के ध्वस्तीकरण में निकले स्वपूजित मंदिरों को वैदिक चालन पद्धति से स्थानांतरित कर गैलरी में संरक्षित किया जाएगा और उनका प्रतिदिन पूजन होगा। आम दर्शनार्थियों को उनका दर्शन भी प्राप्त होगा। मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने काशी विद्वत परिषद के विद्वानों के सुझाव पर अपनी सहमति जताई। इस दौरान प्रो. वशिष्ठ त्रिपाठी, प्रो. रामचंद्र पांडेय, प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, प्रो. रामनारायण द्विवेदी, प्रो. दिनेश गर्ग, पं. दीपक मालवीय, डॉ. सुखदेव त्रिपाठी, पं. रजनीश शर्मा, पं. राजेंद्र पाठक शामिल रहे।