वायु प्रदूषण ने दिल्ली समेत कई महानगरों की धड़कनों का बढ़ा दिया है। भले ही यहां इसका अभी कोई असर नहीं है लेकिन कहीं न कहीं इसे लेकर लोग चिंतित जरूर है। उनकी फिक्र को दूर करने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास कोई इंतजाम नहीं है। जिले में प्रदूषण घटा या बढ़ा इसको जांचने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
जनपद में प्रदूषण परखने की जिम्मेदारी प्रदू्षण नियंत्रण बोर्ड की है। इसके अलावा ईंट भट्ठों, निजी अस्पतालों, हॉट मिक्स प्लांट अन्य की स्थापना के लिए एनओसी विभाग ही देता है। जिले में यह बोर्ड सिर्फ एनओसी जारी करने तक ही सीमित रह गया है। हवा की शुद्धता और बढ़ते प्रदूषण पर नजर रखने के लिए बोर्ड पूरी तरह से फेल है। कारण कि बोर्ड की ओर से यहां प्रदूषण मापने का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। शहर के रहने वाले एसके सत्येन, ओमप्रकाश अग्रवाल, मनोज कुमार ने बताया कि शहर की आबादी बढ़ती जा रही है। ऐसे में यहां पर वायु की गुणवत्ता को मापने के लिए एयर क्वालिटी मशीन लगाई जानी चाहिए, ताकि जिले के लोगों को पता चल सके कि यहां की हवा कैसी है।
विभाग के पास सिर्फ ध्वनि मापक यंत्र
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय के पास सिर्फ ध्वनि मापक यंत्र है। इससे वह इंडस्ट्रीयल एरिया, घनी आबादी वाले क्षेत्रों व कामर्शियल क्षेत्रों की डीबी मापता है। विभाग के अनुसार बीते सोमवार की शाम छह से सात बजे के बीच शहर के इंडस्ट्रीयल एरिया सफुद्दीनपुर, महिला अस्पताल, रैदोपुूर व चौक क्षेत्र में ध्वनि की गुणवत्ता की जांच की गई, जो सामान्य थी। संवाद
जनपद में दो साल पूर्व एयर क्वालिटी मशीन लगाए जाने के लिए विभाग ने जमीन की तलाश शुरू की थी। पहले तो कलेक्ट्रेट में लगाने की बात चली, लेकिन वहां पर जगह कम होने से विभाग ने डीएवी काॅलेज के गेट की पास की जमीन को चुना। बाद में सब मामला ठंडे बस्ते में चला गया। शासन से भी इसके लिए कोई दिशा निर्देश नहीं मिला। संवाद
ऊपर से आए निर्देशों के क्रम में पहले डीएवी गेट के पास एयर क्वालिटी मशीन लगाने के लिए जगह देखी गई थी। लेकिन बाद में कोई निर्देश नहीं आया। यहां पर ध्वानि मापक यंत्र हैं, जिससे ध्वनि की गुणवत्ता मापी जाती है। वायु की गुणवत्ता मापने का कोई यंत्र नहीं है। - ओएस सिद्दीकी, सहायक वैज्ञानिक अधिकारी।