उद्यमियों, कारोबारियों और निर्यातकों की संख्या सबसे ज्यादा
कालीन उद्योग के जरिये देश में अपनी अलग पहचान रखने वाले यूपी के भदोही जिले में भी कई ‘नीरव मोदी’ दबे पांव बैंकों को चूना लगा रहे हैं। विभिन्न बैंकों से करीब सवा अरब रुपये लोन लेकर नहीं चुकाने वाले 11 हजार डिफॉल्टर चिह्नित किए गए हैं। इन्हें इन्हें बैंकों से आरसी भी जारी की जा चुकी है।
इनमें पंजाब नेशनल बैंक के 800, यूबीआई के 2000 समेत अन्य बैंकों से कर्ज लेने वाले हजारों लोग शामिल हैं। इनमें कई निर्यातक और कारोबारी 50 से 60 करोड़ रुपये तक के कर्जदार हैं।
मोटे कमीशन के चक्कर में सारा खेल बैंकों के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से खेला जा रहा है। कर्ज लेने वाले 50 से 60 फीसदी व्यापारी समय पर बैंकों को पैसा लौटा देते हैं लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे भी व्यापारी, निर्यातक और अन्य कर्जदार हैं, जो बैंक के अफसरों से सेटिंग कर बकाया रकम जमा ही नहीं करते। दो से तीन साल के बाद उनके खातों को एनपीए यानी डिफाल्टर घोषित कर दिया जाता है।
बैंकों से सेटिंग के दम पर भदोही जिले में 11 हजार डिफॉल्टरों पर 125 करोड़ रुपये से ज्यादा की देनदारी है। यूबीआई, पीएनबी, एसबीआई समेत अन्य बैंकों के करीब चार हजार डिफॉल्टरों ने 100 करोड़ रुपये जमा नहीं किया।
वहीं, सहकारी बैंकों के सात हजार डिफॉल्टर 25 करोड़ रुपये दबाए बैठे हैं। बैंक से मिली जानकारी के अनुसार 15 निर्यातक और पांच कारोबारियों ने ही 50 करोड़ से अधिक का बकाया नहीं जमा किया।