बीएचयू के वैदिक विज्ञान केंद्र में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में वैदिक विज्ञान के स्वरूपों पर चर्चा की गई। मुख्य अतिथि बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि वैदिक विज्ञान केंद्र को केवल डिग्री देने वाला केंद्र नहीं बल्कि नए-नए शोध करने और कराने वाला केंद्र बनना चाहिए। श्रीलालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुरली मनोहर पाठक ने कहा कि यदि पर्यावरण को (वेद विदित) माता के तुल्य माना जाए तो हम पर्यावरण को दूषित नहीं करेंगे। त्रिभुवन विश्वविद्यालय नेपाल के प्रो. श्यामनारायण ने कहा कि विश्व के सभी विषय वेद में समाहित हैं। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार के कुलपति प्रो. रामाकांत पांडेय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का परीक्षण करने की आवश्यकता है। अध्यक्षता करते हुए संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय प्रमुख प्रो. राजाराम शुक्ल ने कहा कि वैदिक अध्ययन के माध्यम से हम वैज्ञानिकों को समाज के विकास और रक्षा के लिए एक शस्त्र प्रदान कर रहे हैं। स्वागत प्रो. विनय कुमार पांडेय, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विवेक पाठक ने किया।