संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर अनियमित नियुक्ति के मामले में सोमवार को वित्त विभाग से वीसी आवास तक की फाइलों की उधेड़बुन चली। कुलपति ने दफ्तर खुलते ही लेखा विभाग को तलब कर लिया। पता चला कि लेखा विभाग ने इस मामले से जुड़ी एजी की रिपोर्ट वीसी के सामने पेश की थी। 26 दिसंबर, 2016 को वीसी ने इस रिपोर्ट पर कार्रवाई के लिए रजिस्ट्रार को निर्देश भी दिया था लेकिन मामला दबा दिया गया। कुलपति ने बताया कि मामले की जांच कराई जा रही है।
महालेखा परीक्षक की 24 नवंबर, 2016 को इस प्रकरण में जारी रिपोर्ट रजिस्ट्रार दफ्तर में पिछले छह महीने से दबा कर रखी गई है। एजी की रिपोर्ट पर कुलपति प्रो. यदुनाथ प्रसाद दुबे ने भी अनभिज्ञता जाहिर की थी। सोमवार को कार्यालय खुलने के बाद वीसी ने लेखा विभाग को इस मामले में तलब किया। लेखा विभाग की ओर से बताया गया कि 26 दिसंबर को वीसी के समक्ष एजी की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी। उसी समय वीसी ने रजिस्ट्रार को मामले में कार्रवाई का निर्देश दिया था। इस बीच पता चला कि इस मामले से जुड़े दूसरे फर्जीवाड़ों पर परदा डालने के लिए भी खेल शुरू हो गया है।