शोर-शराबा, चीख-पुकार और अपनों की सलामती की छटपटाहट कैंट रेलवे स्टेशन पर रविवार को हर तरफ नजर आई। रात 10:10 बजे पुखरायां से चली विशेष जब प्लेटफार्म नंबर चार पर ट्रेन आने के इंतजार की घड़ी खत्म हुईं और अपनों की झलक दिखी तो प्लेटफार्म पर मौजूद तमाम लोगों का दर्द आंखों से छलक पड़ा। सुबह से बदहवास एक से दूसरे प्लेटफार्म का चक्कर काटते उदास चेहरों पर थोड़ी राहत दिखने लगी। ट्रेन आने के साथ ही जहां परिजन बोगियों में अपनों की तलाश करते दिखे तो वहीं पीड़ित भी अपनों से मिलने के लिए उतने ही बेसब्र नजर आए। अपनों को सलामत देख हर कोई हाथ उठाकर ऊपरवाले का आभार जता रहा था। विशेष ट्रेन 20 मिनट बाद आगे रवाना हो गई। ट्रेन में लगभग 600 लोग सवार थे। राजेंद्र नगर टर्मिनल तक जाने वाली इस ट्रेन में इंदौर पटना की बोगियां भी लगाई गई थी।
डरे-सहमे साल भर के बच्चे को गोद में चिपकाए, छपरा की रहने वाली पूजा सिंह केचेहरे पर खुशी और आंख में दर्द साफ नजर आ रहा था। दुर्घटना के दौरान एस-8 में सफर कर रही पूजा ने बताया कि एक जोर का झटका लगा और उसके बाद केवल चीख-पुकार ही सुनाई दे रही थी। सामने घाट के रहने वाले संजय दूबे ने बताया कि एस-1 से लेकर एस-6 तक की बोगियों का बहुत बुरा हाल था। फंसे लोगों को बाहर निकालने के दौरान घायल हुए संजय चोटिल भी हो गए।
पटना के रहने वाले खुशनूद ने बताया कि ट्रेन के एस-6 में झांसी के समीप से जोर-जोर से आवाज आ रही थी। शिकायत के बावजूद इस पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि खुद रेल यात्री और आसपास के ग्रामीणों ने सबसे पहले राहत और बचाव कार्य शुरू किया। सबसे ज्यादा मौतें और घायल भी इन्हीं बोगियों में थे।
एस-10 में सफर कर रही पूजा पांडेय ने बताया कि बहुत दर्दनाक मंजर था। आरा की रहने वाली शशि सिंह अपने आपको भाग्यशाली बता रही थी क्योंकि जिस एस-2 बोगी में वह सफर कर रही थीं उसकी स्थित सबसे ज्यादा खराब थी। एस-1 में सफर कर रहे हाजीपुर के सागर ने बताया कि एक घंटे बाद रेलवे से सहयोग मिला। परिवार के साथ इंदौर से पटना जा रहे मनोज चौधरी ने बताया कि रेलवे को कुछ ऐसे कदम उठाने चाहिए, जिससे कि यात्री सुरक्षित और विश्वास के साथ सफर कर सकें । एस-8 रोहित चौधरी, इंदू पांडे और उनकी बेटी पूजा, सुनील, सागर, श्वेता, अपर्णा ने आपबीती सुनाई तो उनकी आंखे डबडबा गईं।
वाराणसी आ रहे चोलापुर के पराग डीह निवासी महेश कुमार के परिवारीजन हादसे की सूचना पाकर बेहाल हो गए। सूचना मिलने के तुरंत बाद महेश से संपर्क नहीं हो सका। बाद में महेश से संपर्क हुआ और उसके सुरक्षित होने की सूचना के बाद परिजनों की जान में जान आई। महेश भोपाल में एक प्राइवेट कंपनी में कार्य करते हैं। महेश देर शाम अपने घर पर पहुंचे। 24 नवंबर को उनके घर में शादी है। महेश ने बताया कि हादसे के वक्त ट्रेन की रफ्तार तेज थी और उसके पहियों के आसपास से तेज आवाज आ रही थी। उनके बगल बैठी एक महिला ने टीटी से इसकी शिकायत भी की थी पर कोई ध्यान नहीं दिया।