कुपोषण से मुक्ति के लिए चल रही योजनाओं में कागज में तो सब ठीक चल रहा है लेकिन हकीकत में जो आंकड़ा है वो चौकाने वाला है। दीनदयाल अस्पताल के पोषण पुनर्वास केंद्र तक बच्चे तो नहीं पहुंच पा रहे हैं लेकिन वर्तमान समय में नगर क्षेत्र के अलावा जिले के सभी आठ ब्लॉकों में 32795 बच्चे अतिकुपोषित हैं।
इसमें भी एक हजार से अधिक ऐसे बच्चे हैं, जिन्हें बेहतर इलाज की जरूरत है, जिससे कि सेहत में सुधार हो सके। सबसे अधिक नगर क्षेत्र में 9373 और सबसे कम 1140 बच्चे हरहुआ ब्लॉक में चिन्हित हैं। हालांकि पिछले साल की तुलना में बच्चों के आंकड़े में 20 हजार का इजाफा हुआ है।
इससे यह लग रहा है कि समय-समय पर अधिकारियों के दौरे, समीक्षा बैठकों का कोई मतलब नहीं है। कुपोषण से प्रभावित बच्चों का बेहतर इलाज हो सके, इसके लिए दीनदयाल अस्पताल परिसर स्थित दस बेड के पोषण पुर्नवास केंद्र की स्थापना तो की गई है लेकिन यहां बच्चे भर्ती नहीं हो पाते हैं।
केंद्र पर चिकित्सकीय परीक्षण के साथ-साथ उम्र के हिसाब से पोषण देने की व्यवस्था है। उधर डीएम, सीडीओ से लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी दौरे के समय अधिक से अधिक बच्चों को यहां भर्ती कराकर उन्हें आवश्यक पोषण दिए जाने का निर्देश देते हैं लेकिन उसका कोई असर नहीं दिख रहा है।
ब्लॉकवार शिविर लगाकर ऐसे बच्चों को चिन्हित कर उन्हें यहां भर्ती कराने की भी व्यवस्था है लेकिन हरहुआ, चिरईगांव को छोड़कर और किसी केंद्र से बच्चों का नाम सामने नहीं आ पाता है। पिछले साल अप्रैल तक अतिकुपोषित बच्चों का आंकड़ा 12566 था, जो इस समय बढ़कर 32795 हो गया है।
पुनर्वास केंद्र पर अब भी बेड खाली
पोषण पुनर्वास केंद्र पर भर्ती होने वाले बच्चों के आंकड़ों पर गौर करें तो कुपोषण दूर करने के लिए बनी व्यवस्था और जिम्मेदार लोगों पर भी कई तरह के सवाल खड़ा होने लगे हैं। दस बेड वाले केंद्र पर पांच पांच बेड खाली है। यहां सारी व्यवस्थाएं भी हैं लेकिन ब्लॉकों से बच्चे नहीं भेजे जा रहे हैं।
केंद्र पर भर्ती बच्चों के साथ-साथ अटेंडेंट पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यहीं वजह है कि कुछ बच्चों के अभिभावक एक दो दिन यहां रखने के बाद बच्चों को घर ले जाते हैं।