गंगा किनारे दो सौ मीटर के दायरे में आने वाले अवैध निर्माणांे के खिलाफ वीडीए की कार्रवाई का सच जानने शनिवार को हाईकोर्ट की ओर से गठित तीन सदस्यीय न्यायमित्र की टीम यहां पहुंची।
टीम ने वीडीए के अफसरों के साथ बैठक की। गंगा किनारे ध्वस्तीकरण की अब तक हुई कार्रवाई के बारे में पूछा। अवैध निर्माण के रूप में चिह्नित 57 मकानों की फाइलें भी खंगालीं।
इस दौरान वीडीए के अधिकारी एक के बाद एक फाइल दिखाते रहे और फाइलों की पड़ताल के दौरान टीम की आेर से उठाए गए सवालों के जवाब देते रहे। हाईकोर्ट की ओर से गठित टीम पूरे दिन वीडीए कार्यालय में बैठी रही। करीब चार घंटे तक फाइलों को खंगालने का सिलसिला चला।
इस दौरान किसी को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं थी। सूत्रों के मुताबिक, सदस्यों ने पूछा कि दो सौ मीटर के दायरे में बने अवैध भवन जो पूर्व में चिह्नित किए गए थे उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई। उसके बाद से कोई नया निर्माण तो नहीं हुआ। इससे संबंधित फाइलों की सूची मंगाई और फिर रैंडमली फाइल मंगाकर उसकी छानबीन की।
टीम के सदस्य फाइलों की जांच पड़ताल के बाद रविवार को गंगा किनारे जाकर स्थलीय निरीक्षण भी करेंगे।
इस दौरान वे इस बात की तस्दीक करेंगे कि वीडीए ने जिन मकानों को गंगा से दो सौ मीटर के दायरे में चिह्नित किया है, उनकी वास्तविक स्थिति क्या है। आदेश के बाद भी ऐसे भवनों को ढहाया गया या नहीं। अब तक वीडीए ने कार्रवाई के नाम पर जो कागजात उपलब्ध कराए हैं, वे कितना सच हैं। तीनों सदस्य आदिकेशव घाट से लेकर अस्सी घाट तक गंगा किनारे अवैध निर्माण का हाल जानेंगे। बैठक में वीडीए के आला अफसर मौजूद रहे। हालांकि फाइलों की पड़ताल के बारे में उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार किया।