महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के दर्शनशास्त्र विभाग में विश्व दर्शन दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में बीएचयू दर्शन एवं धर्म विभाग के पूर्व प्रोफेसर उमेश चंद्र दूबे ने कहा कि श्रीअरविंद दर्शन में निहित सामंजस्य का सिद्धांत दैनिक जीवन को रचनात्मक बनाने का मूलमंत्र प्रदान करता है। इसके भावों को समझना होगा। विशिष्ट अतिथि मानविकी संकाय के अध्यक्ष प्रो. अनुराग कुमार ने साहित्य एवं दर्शन के सामंजस्य, समरसता पर अपनी बात रखी। विशिष्ट वक्ता छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. राजेश कुमार मिश्रा ने भागवत पुराण सहित विविध दार्शनिक संदर्भों के माध्यम से दर्शन की समकालीन प्रासंगिकता और व्यापक महत्व को बताया। इस दौरान विभागाध्यक्ष प्रो. नंदिनी सिंह ने कहा कि दर्शन दिवस जैसे आयोजन से हमें जीवन, समाज, ज्ञान और सत्य से जुड़े मूलभूत प्रश्नों पर पुनर्विचार का अवसर मिलता है। संचालन डॉ. कविता, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अंबरीश राय ने किया।