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तुलसी ने श्रीराम की मर्यादा को दी प्रधानता

Thu, 11 Aug 2016 02:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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आदि कवि तुलसीदास की जयंती पर बुधवार को विभिन्न संस्थानों की ओर से समारोह पूर्वक मनाई गई। इस दौरान लोगों ने उनके द्वारा रचित काव्यों पर विस्तृत चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि तुलसीदास ने भक्ति और ज्ञान की गंगा प्रवाहित की है। जन्म के समय ही जहां उन्होंने राम-राम का उच्चारण किया था, वहीं आगे चलकर रामचरितमानस लिखा। सुमेरुपीठ काशीपुरी स्थित जगदगुरु शंकराचार्य महासंस्थानम में आयोजित कार्यक्रम में विनयपत्रिका के भजनों के माध्यम से गुणगान किया।
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सुमेरुपीठ में जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि तुलसीदास ने जिस रामचरितमानस को लिखा था, वह धर्म-भक्ति और ज्ञान की त्रिवेणी के रुप में लोककल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। इसमें उन्होंने भगवान राम के वैभव से कहीं अधिक उनके मर्यादा को प्रधानता देकर श्रद्धालुओं की भावना को प्रगाढ़ बनाने का काम किया।  इस दौरान दंडी समाज के अध्यक्ष स्वामी राजेश्वर आश्रम, महामंत्री स्वामी प्रकाश देव आश्रम, स्वामी अखंडानंद तीर्थ, ओंकारनाथ दूबे, डॉ. लक्ष्मण तिवारी सहित कई लोग मौजूद रहे। नागरी प्रचारणी सभा द्वारा आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति गणेश दत्त दूबे ने कहा कि तुलसीदास ने साहित्य का जितना व्यापक अध्ययन किया, उसका वृतांत कविता में दिखता है।


डॉ.रामसुधार सिंह ने कहा कि तुलसी को स्मरण करना मानव मूल्यों को स्मरण करने के बराबर हैं।  हिमांशु उपाध्याय ने मानस पाठ के संदेशों को जीवन में उतारने में बल दिया। इस दौरान सभाजीत शुक्ल, डॉ.विजयेंद्र नाथ मिश्र, नरोत्तम शिल्पी सहित कई लोग मौजूद रहे। तुलसीमानस मंदिर में तुलसीदास की प्रतिमा का विशेषार्चन हुआ। इस मौके पर मानस मंदिर के मैनेजिंग ट्रस्टी मधुसूदन सुरेका, प्रदीप कुमार, शिवजी सिंह, त्रिलोचन शर्मा समेत तमाम लोग मौजूद रहे।
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