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लगेगा श्राद्ध का मेला, पिंडदान से तरेंगी 17 पीढ़ियां

Thu, 15 Sep 2016 02:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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नरकेषु समस्तुषु यातनासु च ये स्थिता:। तेषमाप्यायनायैतद्दीयते सलिलं मया/ये बांधवा बांधवाश्च येन्यजन्मनि बांधवा: ते तृप्ति मखिलायांतु यश्चास्मत्तोभिवांछति/ ये में कुले लुप्तपिंडा: पुत्रदार विवर्जित:। शिवगया के रूप में प्रसिद्ध काशी में प्रथम श्राद्धभूमि पिशाच मोचन है। प्रथम वेदी काशी के बाद द्वितीय वेदी फाल्गु नदी और तृतीय वेदी गया को कहा गया है। काशी में श्राद्ध के प्रेतात्माओं को मुक्ति मिलेती है, जबकि गया जाने के बाद पितरों को मोक्ष मिल जाता है। महालया यानी 16 सितंबर से काशी में मातृ-पितृ पक्ष की कुल 17 पीढ़ियों के नाम तर्पण-अर्पण श्राद्ध होगा। पिंडदान के लिए कुंडों से घाटों तक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
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प्रथम श्राद्ध भूमि पिशाच मोचन पर देश ही नहीं दुनिया भर में फैले सनातनधर्मी पितरों को श्राद्ध अर्पित करने के लिए पहुंचेंगे। भादों की पूर्णिमा यानी 16 सितंबर से काशी में पूर्वजों के स्मरण का पर्व पितृपक्ष आरंभ होगा। प्रेतयोनि में भटकती आत्माओं की शांति सिर्फ पिशाचमोचन कुंड पर होगी। इसके लिए पिशाचमोचन के तीर्थपुरोहितों ने बुधवार को सफाई शुरू करा दी। कुंड में फैली गंदगी के अलावा कचरे छानने का काम शुरू हो गया। उधर, सड़कों की पटरियों पर श्राद्ध कराने वाले पुरोहित अपनी जगह पक्की करने में जुट गए। पितृकुंड, मणिकर्णिका और दशाश्वमेध, अहिल्याबाई घाट, धर्मकूप पर भी तिल, जौ, अक्षत, पुरवा और कुशासनी का बाजार भी सज गया है।



पिशाच मोचन कुंड पर त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए तैयारियां कर ली गई हैं। पूर्णिमा महालया पर सबसे अधिक भीड़ यहां उमड़ेगी। तीर्थपुरोहित मुन्ना लाल पांडेय बताते हैं कि बिमल तीर्थ के नाम से प्रसिद्ध पिशाच मोचन कुंड पर होने वाले त्रिपिंडी श्राद्ध के साथ ये मान्यताएं जुड़ी हैं । माना जाता है कि अकाल मृत्यु मरने के बाद भटकने वाली आत्माओं को यहां श्राद्ध करने से मुक्ति मिल जाती है। इसीलिए पितृ पक्ष के दिनों में पिशाच मोचन कुंड पर वंशजों की भीड़ लगती है। आश्विन मास के कृष्ण पक्ष से शुरू होने वाले पितृपक्ष में पितरों की मुक्ति के लिए 15 दिन जतन किए जाएंगे। मीर घाट स्थित धर्मकूप पर भी श्राद्ध और तर्पण-अर्पण के लिए भीड़ लगेगी। बता दें कि प्रथम श्राद्ध भूमि काशी है जबकि द्वितीय श्राद्ध भूमि फाल्गु नदी का तट और तृतीय गया।
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