संकट मोचन की सभा में ग्वालियर, जयपुर और आगरा सहित तीन घराना की गायकी में सिद्धहस्त पद्मश्री प्राप्त पंडित उल्हास कशालकर ने राग भोपाली और राग शहाना में बनारसी श्रोताओं का लयबद्ध शृंगार किया। अपने शास्त्रीय सुरों में सौंदर्यशास्त्र का एहसास रखते हुए पारंपरिक रागों से हनुमान जी की प्रार्थना की। उनके साथ तबले पर रहे मराठी कलाकार और पद्मश्री से सम्मानित पं. सुरेश तलवलकर अपने तालयोगी अंदाज में नजर आए। संवादिनी पर पं. विनय मिश्र और अन्य कलाकारों ने बड़ी सादगी के साथ संगीत के दो पुरोधाओं का संगत किया। प्रस्तुति के बाद बारिश होने के चलते कई भक्त वहीं बैठकर मंच पर ध्यान मग्न हो गए। दूसरी प्रस्तुति में बंशी का कलरव और तबले की थाप का मिलन राधा-गोपाल की लीला जैसी लगी जो कि श्रोताओं की भावनाओं की महिमा गाते हुए उनके आध्यात्मिक चक्षुओं को खोल रही थी। बांसुरी पर पंडित विवेक सोनार और तबले पर शुभ महाराज ने जब ओम जय जगदीश हरे का नाद किया तो संकट मोचन दरबार का दर्शन करने वाले भक्तों का सब दुख दर्द छूमंतर हो गया। इसी बीच दोनों वाद्य यंत्रों की साज हनुमन श्रोताओं को आध्यात्मिक और प्राकृतिक संगीत के चरम पर लेकर चली गई। इन्होंने मंच पर कई शास्त्रीय रागों को बड़े मनमोहक अंदाज में प्रस्तुत किया।