2008 में अहमदाबाद में हुए सीरियल ब्लास्ट में दोषी जिले के सात युवकों में से छह को अहमदाबाद कोर्ट ने फांसी और एक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सजा पाने वाले युवकों के गांव में दूसरे दिन भी सन्नाटा पसरा रहा जबकि अबु बशर तथा जीशान के घरों पर ताले लटके रहे।
अहमदाबाद ब्लास्ट में 59 लोगों की मौत हुई थी। घटना में जिले के 10 लोगों के नाम प्रकाश में आये थे। इसमें इस कांड का मास्टर माइंड जिले के सरायमीर क्षेत्र के बीनापारा गांव निवासी अबु बशर के अलावा संजरपुर निवासी मो. सैफ, आरिफ मिर्जा नसीम, इसरौली निवासी आरिफ, बदरका निवासी सैफुल रहमान व कोट किला निवासी मो. जीशान व सरायमीर के पारा गांव निवासी मो. सादिक शामिल थे। शुक्रवार को अहमदाबाद कोर्ट ने सजा सुनाई। जिसमें मोहम्मद सादिक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है वहीं अन्य छह युवकों को फांसी की सजा दी गई है। सजा सुनाने के दो दिन पूर्व ही बीनापारा गांव निवासी अबु बशर के परिजन घर पर ताला बंद कर कहीं जा चुके हैं। शनिवार को दूसरे दिन भी इस घर पर लगा ताला नहीं खुला। वहीं गांव में भी सन्नाटा पसरा नजर आया। नाम न छापने की शर्त पर बीनापारा गांव के कुछ लोगों ने कहा कि अभी सजा सुनाई गई है पर हाईकोर्ट जाने का रास्ता खुला है।
वहीं शहर के बदरका मुहल्ला निवासी सैफुल रहमान के घर वाले पूरी तरह से चुप्पी साधे नजर आए। कोट मुहल्ला निवासी जीशान के घर भी सन्नाटा देखने को मिला। संजरपुर निवासी मो. सैफ के घर पर भी कोई नहीं है और गांव के लोग सैफ को सुनायी गई सजा को लेकर चर्चा करते नजर आए। ऐसा ही कुछ माहौल आरिफ मिर्जा नसीम व आरिफ ब्रदर के अलावा पारा गांव निवासी मो. सादिक के घर पर भी देखने को मिला।