91 साल से पहचान रही है खाकी हाफ पैंट
युवा पीढ़ी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जोड़ने के लिए संघ ने अपने गणवेश में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव किया है। संघ के स्वयंसेवक इसी साल विजयादशमी से नए गणवेश ‘भूरी फुल पैंट’ में नजर आएंगे। यह पैंट खादी की होगी, जिसे संघ ही अपने स्वयंसेवकों को मुहैया कराएगा।
संघ के एक वरिष्ठ प्रचारक के मुताबिक केंद्रीय स्तर से क्षेत्रीय स्तर और फिर प्रांतीय स्तर तक गणवेश बदलने का संदेश पहुंचाया जाएगा। कौन सा भूरा रंग फुल पैंट के लिए इस्तेमाल करना है और कौन सा कपड़ा इस्तेमाल होना है, इसकी जानकारी शाखा में आने वाले हर स्वयंसेवक को दी जाएगी। बताया कि पैंट खादी की होगी। हर जिला नए गणवेश की तैयारी करेगा। कहा कि यह एक बड़ा काम है और हर जिला टीम को इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी। बहरहाल, 91 साल बाद यह पहला मौका होगा जब संघ की ट्रेड मार्क रही ‘खाकी हाफ पैंट’ को स्वयंसेवक राम-राम कहेंगे।
संघ की वर्दी की बाकी चीजों में वक्त के साथ बदलाव हुआ मगर खाकी हाफ पैंट स्थापना काल से संघ के गणवेश में शामिल रही। विजयादशमी का दिन संघ के लिए काफी अहम है। इसी दिन वर्ष 1925 में डॉ. बलिराम हेडगेवार ने संघ की स्थापना की थी। यही वजह है कि नया गणवेश विजयदशमी के दिन से ही पूरी तरह लागू करने की तैयारी है।
खाकी हाफ पैंट की जगह फुल पैंट करने की कवायद साल 2010 से चल रही थी, लेकिन संघ के भीतर ही इसका काफी विरोध हुआ। 2010 में जब किसी भी तरह सहमति नहीं बनी तो तय किया गया कि अब पांच साल बाद इस पर बात की जाएगी। जिसके बाद साल 2015 की संघ की शीर्ष टीम ने भी इस पर चर्चा की। मगर तब भी सहमति नहीं बन पाई थी। सूत्रों के मुताबिक संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों ने इस पर जोर दिया कि युवाओं को जोड़ने के लिए बदलाव जरूरी है, जिसके बाद अब नेकर बदलकर फुल पैंट करने का फैसला ले लिया गया। मालूम हो कि संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की राजस्थान के नागौर में पिछले दिनों हुई बैठक में खाकी हाफ पैंट को हटाने का फैसला लिया गया था। इसके पीछे बदलते वक्त के साथ आगे बढ़ने का तर्क दिया गया था।