काशीराज वेदों की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहे। वेदों का संरक्षण होता रहे, इसके लिए वे आजीवन प्रयासरत थे। सांग्वेद विद्यालय के प्रति उनका विशेष स्नेह आजीवन बना रहा। काशीनरेश से काशी प्रकाशित होती थी। वे एक जनप्रिय शासक थे। काशी विश्वनाथ के प्रतिनिधि काशी नरेश आदर्श नरेश थे।
ये बातें सांग्वेद विद्यालय के अध्यक्ष विशेश्वर शास्त्री द्राविड़ ने कहीं। वह शुक्रवार को काशीराज स्व. डॉ. विभूतिनारायण सिंह की 26वीं पुण्यतिथि पर रामघाट स्थित सांग्वेद विद्यालय में आयोजित स्मृति सभा को संबोधित कर रहे थे। विशेश्वर द्राविड़ ने कहा कि काशी नरेश का चरित्र अनुकरणीय था। वह अत्यंत विनयशील थे। काशी नरेश अंतिम समय तक अपनी बात से कभी डिगे नहीं। वेदमूर्ति पं. पांडुरंग पुराणिक ने कहा कि ब्राह्मणों के प्रति वेद के प्रति और संस्कृति और संस्कारों के प्रति उनका विशेष ध्यान रहता था। वे महान व्यक्तित्व के थे, उनका आदर्श व्यक्तित्व हम सबके लिए अनुकरणीय है। अध्यक्षता पं. दिनेश रामनाथ जोशी ने की। इस अवसर पर पं. अरुण दीक्षित, चक्रवर्ती विजय नावड, तरुण पांडेय, जितेंद्र द्विवेदी, वेंकटेश्वर द्राविड़ उपस्थित थे।