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राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की संगोष्ठी में बोले राज्यपाल

Mon, 11 Jan 2016 01:40 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
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शिक्षा के व्यवसायीकरण से भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, जो शिक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती है। व्यवसाय करना खराब बात नहीं है लेकिन दूसरों को फंसाना गलत है। कॉलेजों में छात्रों से पांच रुपये की कीमत वाला फार्म 100 रुपये वसूला जा रहा है। इस पर रोक लगाने की जरूरत है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के शताब्दी भवन में रविवार को आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन अवसर पर राज्यपाल ने ये बातें कहीं।
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राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की ओर से शिक्षा में शाश्वत जीवन मूल्य विषयक संगोष्ठी में राज्यपाल ने कहा कि अच्छा विद्यार्थी बनने के लिए अच्छे शिक्षक की जरूरत है। इसलिए शिक्षा को मिशन मानकर काम करना होगा। कहा कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में हर हाल में फरवरी तक दीक्षांत समारोह हो जाएंगे।
 कहा कि नकल तेजी से बढ़ रहा है। इस पर कैसे अंकुश लगाया जाए, इस पर काम करने की जरूरत है। कहा कि यह दुर्भाग्य है कि दुनिया के टॉप 200 विश्वविद्यालयों में भारत का एक भी विवि नहीं है। इस दौरान आधुनिक ज्ञान विज्ञान संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो. प्रेमनारायण सिंह के काव्य संग्रह ‘कर्मण्येवाधिकारस्ते’ का विमोचन भी कुलाधिपति समेत अन्य अतिथियों ने किया।
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समारोह में लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. डीपी सिंह और काशी विद्यापीठ के पूर्व कुलपति प्रो. केपी पांडेय को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम प्रभारी डॉ. जगदीश सिंह दीक्षित ने संगोष्ठी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अतिथियों का स्वागत संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. यदुनाथ प्रसाद दूबे और आभार प्रो. प्रेमनारायण सिंह ने जताया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शैलेश कुमार मिश्र ने किया। 
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