जैन मुनि आचार्य विशद सागर महाराज ने कहा कि विश्व शांति के लिए आपस में एक दूसरे के उपकार का सूत्र अपनाना होगा। कल्पतरु महामंडल विधान दैहिक, दैविक एवं भौतिक सुख देने वाला है। कल्पतरु विधान इच्छित फलों की पूर्ति करता है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। वह शनिवार को भगवान पार्श्वनाथ की जन्मभूमि भेलूपुर स्थित जैन मंदिर में कल्पतरु महामंडल विधान के आयोजन के दौरान प्रवचन दे रहे थे।
शनिवार को सुबह विशद सागर महाराज के सानिध्य में श्री 1008 कल्पतरु महामंडल विधान का आयोजन किया गया।
प्रात: छह बजे से श्री जी का अभिषेक, शांतिधारा, जिनाज्ञा, देवाज्ञा, आचार्य निमंत्रण घट यात्रा, मंडप प्रतिष्ठा के विधान संपन्न हुए। जैन समाज की महिलाएं सिर पर कलश रखकर लाल रंग के परिधान में नगर भ्रमण के लिए निकलीं। हाथ में ध्वज और निशान लेकर जैन समाज के लोग केसरिया वस्त्रों में शामिल हुए। शाम को महाआरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महोत्सव के पुण्यार्यक राजमणि देवी हैं। रविवार को श्रीजी का अभिषेक, नित्य नियम पूजन, विधान पूजन, आरती और पंथ कल्याणक दृश्यों का नाटकीय मंचन होगा। कल्पतरु महामंडल विधान का आयोजन तीन अक्तूबर तक होगा।