तुलसीघाट पर रामकथा मंदाकिनी शोभायात्रा में भगवान के स्वरूप में सजे पात्र।
काशी पौराणिक काल से यात्राओं की नगरी है। सावन में पंचक्रोशी यात्रा, अंतरगृही यात्रा तो चैत में नव दुर्गा, नव गौरी, पंच गौरी की यात्राओं के जरिए सुख-समृद्धि की कामना के लिए लोग घरों से निकलते हैं। रामनवमी पर गंगा के जल मार्ग पर निकाली जाने वाली एक अनूठी यात्रा का नाम है रामकथा मंदाकिनी शोभायात्रा। शुक्रवार की शाम तुलसी घाट से नावों-बजड़ों के साथ निकली इस शोभयात्रा में भगवान राम के जन्म के साथ ही मानस के विविध प्रसंगों पर आधारित झांकियां आकर्षण का केंद्र बन गईं।
संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने शाम छह बजे गंगा की मध्यधारा के बीच नावों-बजड़ों पर सजी झांकियों की आरती उतारी। इसके बाद भारत विकास परिषद के सदस्यों की ओर से भजनों की गूंज मच गई। संकल्प संस्था की ओर अनिल जैन ने यात्रा में शामिल मल्लाहों को केसरिया साफा बांधा कर सम्मानित किया। इसके बाद नावों-बजड़ों पर राम की लीलाओं पर आधारित 24 झांकियां यात्रा निकल पड़ीं। चेत सिंह घाट, हनुमान घाट, हरिश्चंद्र घाट, केदार घाट, चौकी घाट, पांडेय घाट, दशाश्वमेध घाट होते हुए शोभायात्रा भैंसापुर घाट पहुंची।
वहां बाल विश्वविद्यालय के डॉ. जयशिला पांडेय ने सीताराम के स्वरूपों की आरती उतारी। तीन श्रेष्ठ झांकियों को चेतमणि आर्नामेंट, सैम इंजीनियरिंग कारपोरेशन की प्रबंध निदेशक उषा तिवारी और भोला प्रसाद ने पुरस्कृत किया। तीनों के निर्माताओं को चांदी की भगवान राम की प्रतिमा भेंट की गई। इस मौके पर प्रमोद अग्रवाल, अमित अग्रवाल, संतोष जड़िया, नवीन श्रीवास्तव, बैकुंठनाथ मिश्र, गौरव के दास, बच्चन राम, आशुतोष अग्रवाल, श्रीपति मिश्र, बलराम यादव, भारत विकास परिषद के अध्यक्ष प्रमोद राम त्रिपाठी, बृजमोहन दास, डॉ.अत्रि भारद्वाज, योगेंद्र सिंह, प्रद्युम्न पांडेय, राकेश कालरा, केशव जालान आदि मौजूद थे।