रुपये निकालने के लिए बैंक में लगीं कतारें।
नोटबंदी के बाद से चला आ रहा नकदी संकट गुरुवार को ‘पहली तारीख’ के दबाव से और गहराया। कैश की उपलब्धता की आरबीआई से बैंकर्स तक की तैयारियां वेतनभोगियों, आम लोगों की जरूरतों के आगे छोटी पड़ गईं। सरकार के निर्देश के बावजूद अधिकतर बैंकों में कर्मचारियों, पेंशनधारकों के लिए अतिरिक्त काउंटर नहीं खुले। कैश की किल्लत के बीच शहर से गांवों तक बैंकों और एटीएम पर लंबी कतारें लगीं। घंटों लाइन में लगने के बाद भी जहां कई लोगों को उनकी जरूरत के हिसाब से पैसे नहीं मिले, वहीं कई लोग ऐसे भी रहे, जिन्हें कैश खत्म होने पर खाली हाथ लौटना पड़ा। हालांकि बैंकर्स ने शादी-विवाह, इलाज आदि जरूरतों के लिए ग्राहकों को 24 हजार रुपये तक भुगतान की जानकारी दी है।
पहली तारीख को खातों में वेतन, पेंशन की धनराशि पहुंचने के बाद निकासी के लिए बैंकों, एटीएम पर कर्मचारियों, पेंशनधारकों का अतिरिक्त दबाव बढ़ा। कैश के लिए आम लोगों की भीड़ भी पहले की तरह रही। बैंक-वित्त प्रबंधन से जुड़े लोगों के लिए हालात संभालना कठिन था। अधिकतर बैंकों में अतिरिक्त काउंटर न होने से कर्मचारियों और पेंशनधारकों को घंटों कतार में लगना पड़ा। हालांकि कुछ बैंक शाखाओं, प्रधान डाकघर विशेश्वरगंज सहित कुछ अन्य डाकघरों में अतिरिक्त काउंटर खोले गए।
इससे थोड़ी राहत हुई लेकिन कैश की किल्लत से तमाम कर्मचारियों, पेंशनधारकों को मायूस होना पड़ा। लीड बैंक मैनेजर ने दावा किया कि एसबीआई, पीएनबी, यूबीआई और काशी गोमती संयुत ग्रामीण बैंक के बड़े ब्रांचों में अलग काउंटर बनाए गए थे। हालांकि कुछ बैंकों में बुधवार की देर रात तो कुछ में गुरुवार को दोपहर बाद पांच सौ और दो हजार की नई करेंसी भेजी गई। दरअसल, मांग की तुलना में अभी आरबीआई से काफी कम नकदी उपलब्ध हो पाई है। किसी को उसकी मांग से कम धनराशि दी जा रही है तो सिर्फ इसलिए कि कतार में लगे ग्राहकों में किसी को खाली हाथ न लौटना पड़े।