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कीचड़ में पैर गंदे होने से बच गए पर व्यवस्था मैली हो गई

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बीएचयू अस्पताल में मरीजों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए अस्पताल का कायाकल्प कराया तो जा रहा है लेकिन मरीजों को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। मेडिसिन विभाग की ओपीडी का हालत सबसे ज्यादा खराब है। पर्चा जमा करने के बाद मरीजों को जमीन पर बैठकर इंतजार करना पड़ रहा है। बृहस्पतिवार को महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग सब ओपीडी गेट के सामने नीचे बैठे रहे। कुछ लोग एक किनारे जमा गंदे पानी में पैर लटकाकर टूटी कुर्सियों पर किसी तरह बैठे रहे। कुछ ने ईंटों का सहारा लिया। इस तरह की स्थिति तब है जब खुद अस्पताल के एमएस भी इसी विभाग के प्रोफेसर हैं और उनकी ओपीडी भी सोमवार को होती है।
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बीएचयू अस्पताल में हर दिन बीस से अधिक विभागों की ओपीडी में पांच हजार से अधिक मरीज वाराणसी और आसपास के जिलों से आते हैं। डॉक्टर को समय से दिखाने के लिए बहुत से लोग तो एक दिन पहले ही अस्पताल में आ जाते हैं। सुबह लाइन में लगकर पर्चा कटाने के बाद ओपीडी में पहुंचते हैं। टोकन सिस्टम के लिए लगा डिस्प्ले बोर्ड खराब होने से पर्चा जमा करने के बाद डॉक्टर कब देखेंगे, उनकी बारी कब आएगी, इसकी सही जानकारी नहीं मिल पाती है। लिहाजा मरीजों को परेशान होना पड़ता है। हृदय रोग विभाग, मेडिसिन विभाग, ऑन्कोलॉजी, जनरल सर्जरी सहित कई विभागों में डॉक्टर को दिखाने के लिए मारामारी देखने को मिलती है।
केस-1
ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट की ओपीडी में बिहार से 41 वर्षीय महिला को लेकर परिजन बृहस्पतिवार सुबह पहुंचे। सुबह 10 बजे पर्चा जमा करने के बाद बाहर खड़े रहे। डॉक्टर के कमरे के बाहर टोकन नंबर वाला डिस्प्ले बोर्ड बंद पड़ा था। किसी तरह 12 बजे डॉक्टर को दिखा सके।
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केस-2
लालगंज से 15 वर्षीय बच्ची को लेकर परिजन दोपहर में एक बजे मेडिसिन की ओपीडी में पहुंचे। पंजीकरण कक्ष में बैठे कर्मचारी ने 370 मरीजों का पंजीकरण पूरा होने का हवाला देते हुए शुक्रवार को आने की बात कही। इसके बाद परिजन वापस चले गए।
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