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सुरों से सजी शाम, गूंजे राग-ताल

Wed, 31 Aug 2016 01:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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अघोर चतुर्दशी समारोह में कार्यक्रम पेश करते कलाकार।
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गंगा की बाढ़ घाटों से न उतरने की वजह से इस बार हरिश्चंद्र घाट पर होने वाले अघोर चतुर्दशी संगीत समारोह चेतसिंह किले में किया गया। भोजपुरी लोक संगीत के साथ शास्त्रीय नृत्य, गायन और वादन की यादगार प्रस्तुतियां हुईं। अवधूत उग्र चंडेश्वर कपाली बाबा ने अलग-अलग क्षेत्रों में योगदान देने वाले कई लोगों को विश्वामित्र सम्मान से नवाजा। दो विभूतियों को अघोर योगिनी अलंकरण दिया गया। 
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रात करीब 8:30 बजे संगीत महफिल का आगाज भजन से हुआ। इसके बाद पं. गणेश शंकर मिश्र का स्वतंत्र तबला वादन हुआ। तीन ताल में इन्होंने उठान, बाट, गत, फर्द, कायदा, तिहाई के अलावा छोटी-छोटी गतों को बजाकर वाहवाही बटोरी। इनके बाद राजन तिवारी ने भोजपुरिया मिठास से माहौल को रसमय बना दिया। उन्होंने निर्गुण पेश किया। पक्तियां इस तरह थीं- एक दिन नदी के तीरे जात रहली धीरे-धीरे...। इसके बाद पिया मेहंदी मंगा दा विंध्याचल पहाड़ी से , जाय के ठेला गाड़ी से ना... की प्रस्तुति की  इनके बाद नयन राय की बांसुरी गूंजी। अमलेश शुक्ल अमल ने -बम बम बोल रहा है काशी... को सुरों से सजाकर तालियां बटोरी। स्वाति, नेहा, श्रद्धा पांडेय, रागिनी त्रिपाठी ने भी भजनों, गीतों की प्रस्तुति से मन मोहा। इनके बाद शिल्पी बनर्जी, शिप्रा श्रीवास्तव, ममता मिश्रा का नृत्य यादगार बन गया। 
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