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जगदंबा के द्वार, आस्था अपरंपार

Thu, 30 Mar 2017 02:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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देवी मंदिर में लगी भक्तों की भीड़।
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दुर्गा दुर्गाति शमनी दुर्गा पद्विनिवारिणी/ दुर्गमच्छेदिनी, दुर्ग साधिनी दुर्ग नाशिनी....। दुखों को दूर करने वाली जगत जननी जगदंबा की उपासना का वासंतिक नवरात्र बुधवार को सविधि मंत्रोच्चार के बीच कलश स्थापन से आरंभ हो गया। द्वितीया से युक्त प्रतिपदा में वेदियों पर भक्तों ने कहीं स्वर्ण तो कहीं रजत कलश सजाए। अखंड दीप जलाकर मां आदि शक्ति स्वरूपा की आराधना में श्रद्धालु जुट गए। उधर, फूलों, पत्तियों और रंग-बिरंगी लतरों से सजे देवी मंदिरों में आस्थावानों का रेला उमड़ पड़ा। देर रात तक घंटे-घड़ियाल की गूंज पर मां के द्वारे जयकारे गूंजते रहे।
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नवरात्र लगते ही सुबह वेदिकाओं पर जौ बोए गए। व्रतियों ने चतुष्कोणीय वेदिकाओं पर अभिमंत्रित गंगा जल से कलश भरा। सुपारी, सिक्का घड़े में रखकर आम के पल्लव पर नारियल रखकर मां दुर्गा का आवाहन किया। पुरोहितों ने मंत्रोच्चार के साथ षोडशोपचार विधि से पूजा कराकर कलश स्थापन कराया। अखंड दीपक जलाकर कहीं दुर्गा सप्तशती के पाठ तो कहीं दुर्गा स्तोत्र आरंभ हुआ। देवी की आराधना का यह क्रम इस बार आठ दिन चलेगा। घरों में मां के आवाहन के बाद स्तुतियां आरंभ हो गई हैं। महिलाओं ने समूहों में देवी गीतों, भजनों को स्वर देना शुरू कर दिया। देवी मंदिरों में भोर से लगा श्रद्धालुओं का तांता देर रात तक लगा रहा। हर तरफ मां जगदंबा के गगनभेदी जयकारे गूंजते रहे। नारियल, चुनरी लेकर कतार में लगे श्रद्धालु अपनी बारी की प्रतीक्षा करते रहे। दुर्गाकुंड की दुर्गा माता, शीतला घाट पर शीतला माता के अलावा अन्य देवी मंदिरों में लंबी कतारें लगीं।
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