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बेटे के मोबाइल का डेटा डिलीट था, मोटे चादर से नहीं लग सकता फंदा

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वाराणसी। जालंधर (एनआईटी) में बीटेेक छात्र पंकज केसरी की मौत पर परिजनों ने सवाल उठाते हुए घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। परिजनों का आरोप है कि बेटे की हत्या कर उसे आत्महत्या का रूप दिया गया। पिता दुर्गा केसरी ने तर्क दिया कि बेटे के मोबाइल का डेटा डिलीट था। जिस चादर से उसके फंदे लगाने की बात कहीं गई, वह काफी मोटा था। उससे कोई फंदा कैसे लगा सकता है। दरवाजे की कुंडी तोड़े बगैर उसे कमरे से कैसे बाहर निकाला गया। दरवाजे पर कहीं खरोंच तक नहीं थी।
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पिता दुर्गा केसरी के अनुसार बनारस से जब घटनास्थल पर पहुंचा तो सीधे मोर्चरी हाउस ले जाया गया। काफी जोर देने पर कालेज में उसके कमरे में जाने की अनुमति मिली। कमरे में तख्त (चौकी) नहीं थी। मौके पर मौजूद कॉलेज के लोगों ने बताया कि चादर के सहारे पंकज ने फंदे पर लटक जान दी। पिता के अनुसार मोटे चादर से फंदा लग ही नहीं सकता है। यह भी बताया गया कि दरवाजा अंदर से बंद करके फंदा लगाया, जब दरवाजा बंद था तो उसे कैसे तोड़ा गया। दरवाजे पर खरोंच नहीं थे। जिस सुसाइड नोट को दिखाया गया, उसमें फैंसी तरीके से पंकज के हस्ताक्षर थे। जबकि पंकज सामान्य तरीके से ही हस्ताक्षर करता था। एक सवाल यह भी है कि जब पंकज ने फंदा लगाया तो संबंधित थाने की पुलिस को क्यों सूचना नहीं दी गई, पुलिस के आने से पहले ही क्यों उसे अस्पताल ले जाया गया। घटना का का वीडियो या फोटो क्यों नहीं कराई गई। यह सब पुष्टि करता है कि पंकज की सुनियोजित तरीके से हत्या की गई। सुसाइड नोट का फोरेंसिक जांच होनी चाहिए।
गोदौलिया चौराहे पर नमकीन का ठेला लगाने वाले दुर्गा केसरी ने कहा कि बेटे को न्याय मिलना चाहिए और जो भी दोषी हैं, उन्हें सजा दी जाए। तभी बेटे की आत्मा को शांति मिलेगी।
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दीपावली की छुट्टी में घर आया था पंकज
रूंधे गले से मां किशन तारा देवी ने कहा कि इकलौता बेटा अब दुनिया में नहीं रहा। उसकी हत्या कर दी गई। रोजाना उससे बात होती थी, सोमवार को उससे बात नहीं हुई तो उसके दोस्तों को फोन किया लेकिन किसी ने फोन पर बात नहीं की। उसके सर को फोन किया तो उन्होंने झल्लाकर बात की और कहा कि आकर पंकज को ले जाओ। दीपावली पर घर आया था और छुट्टी बिताकर अपने कॉलेज गया था।
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मां के सूख गए आंसू, बहनों का इकलौता था भाई
बेटे की मौत से मां किशन तारा देवी की आंखों के आंसू सूख गए। बेटे को याद कर वह चीख पड़ रही हैं। तीन बहनों के इकलौते भाई पंकज की मौत से बहनें भी बेसुध हैं। बहनों के अनुसार अब वह किसे राखी बांधेगी। रक्षाबंधन पर पंकज घर आता था। यह बात कहते हुए बहनें भी फफक पड़ रही हैं। तीन बहनों में रेनू व अर्पणा की शादी हो चुकी है। जबकि छोटी बहन लक्ष्मी की शादी नहीं हुई और वह मां और पिता के साथ रहती हैं।
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