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लुटे हुए काफिले का निकला जुलूस

Fri, 14 Oct 2016 02:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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दालमंडी स्थित स्व. डॉ. नाजिम जाफरी के निवास से गुरुवार को लुटे हुए काफिले का जुलूस उठाया गया। इमाम हुसैन और शहीदाने करबला की फतह का पैगाम लेकर अलम और दुलदुल के साथ निकले इस जुलूस में आगे-आगे जहां लोग करबला वालों की तीज का डंका बजाते चल रहे थे, वहीं पीछे लोग इमाम हुसैन का परचम लेकर चल रहे थे। हालांकि हर साल परंपरा के अनुसार ये डंका हाथी पर बजता था, लेकिन इस साल इस जुलूस में शामिल होने आए हाथी के बिदकने के बाद लोग पैदल ही डंका बजाते हुए फातमान की ओर चले।
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डॉ. मुज्तबा जाफरी व मुर्तजा जाफरी के संयोजन में लुटे हुए काफिले का जुलूस पूरी शानोशौकत के साथ उठा। लोग जुलूस में शामिल दुलदुल की जियारत करने उमड़ पड़े। जुलूस अपने कदीमी रास्तों से होता हुआ नई सड़क चौराहा पहुंचा जहां फरमान हैदर ने कलाम पेश किया ‘...हिम्मत हो तो महशर में पयंबर से भी कहना, हम जिंदा-ए-जावेद का मातम नहीं करते।’ इसके बाद जुलूस काली महल, लल्लापुरा होते हुए फातमान पहुंचा।


जुलूस उठने के पहले मौलाना फजले मुमताज ने तकरीर में बताया कि दसवीं मोहर्रम को करबला में इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत के बाद इमाम हुसैन के काफिले को लूट लिया गया था। ग्यारहवीं मोहर्रम को वही लुटा हुआ काफिला जनाबे जैनब व इमाम हुसैन के बेटे जैनुल आबदीन की सरपरस्ती में निकला था। जुलूस में उन्हाेंने इमाम हुसैन की जीत का परचम लहराया। मौलाना ने बताया कि इस जुलूस को चुप का डंका भी कहते हैं। उधर फातमान में मौलाना नदीम असगर ने मजलिस पढ़ी। प्रो. अजीज हैदर, प्रो. ऐनुल हसन, रेहान बनारसी, अंसार बनारसी, सलमान हैदर, प्रिंस रजा, समर शिवालवी, यूसुफ जैदी ने कलाम पेश किए। सरफराज हुसैन व शुजाअत हुसैन खां ने मरसिया पढ़ा। इस जुलूस की एक और खासियत ये भी है कि इसमें नौहाख्वानी और मातम नहीं होता।
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