Varanasi News: अभियोजन पक्ष की तरफ से विशेष लोक अभियोजक विक्रम शील चतुर्वेदी और विशेष लोक अभियोजक आलोक कुमार श्रीवास्तव ने रखा। अदालत में 11 गवाह लोगों ने गवाही दी थी। साक्ष्यों को देखने के बाद अदालत ने सजा सुनाई है।
वाराणसी के विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण रजत वर्मा की अदालत ने बुधवार को 39वीं पीएसी के 99,519 कारतूस नक्सली और माफिया को बेचने मामले में मिर्जापुर पीएसी के हेड आर्मरर रहे रामधनी चौबे को दोषी ठहराया है।
विज्ञापन
अदालत ने रामधनी को 10 साल की सजा सुनाई है। साथ ही 1.20 लाख जुर्माना लगाया है। करीब 20 वर्ष पुराने मामले में हेड आर्मरर की तरफ से तर्क दिया गया कि अभियुक्त बुजुर्ग और अस्वस्थ है। अभियुक्त को कम से कम सजा दी जाए।
प्रकरण के अनुसार, 39वीं वाहिनी पीएसी मिर्जापुर के सैन्य सहायक परमहंस सिंह ने छह मई 2004 को कटरा थाने में हेड आर्मरर रामधनी चौबे के खिलाफ कारतूस गबन, कूटरचना, भ्रष्टाचार समेत अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज कराया था।
विज्ञापन
आरोप था कि मिर्जापुर कोतवाली थाना क्षेत्र के ओमनगर बथुआ निवासी रामधनी चौबे वर्ष 1992 से 2000 के बीच पीएसी का हेड आर्मरर था। इस अवधि में रामधनी ने 99,519 कारतूस गायब कर दिए। बाद में यही कारतूस नक्सलियों को बेचा गया। एम्युनिशन रजिस्टर से कूटरचना का मामला सामने आया था।
मामले की विवेचना यूपी एसटीएफ ने भी की थी। 28 अगस्त 2004 को एसटीएफ के एएसपी मान सिंह ने चौहान ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। बाद में अभियुक्त रामधनी चौबे ने त्वरित निस्तारण के लिए अपनी पत्रावली अलग करवा ली थी।