नमामि गंगे योजना के तहत बन रहे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण में सुस्ती काम करा रही एजेंसी को भारी पड़ने लगी है। तय समय से काफी पीछे काम होने के कारण कार्यदाई संस्था जलनिगम की तरफ से प्रतिदिन की दर से अर्थदंड लगाया गया था। इसकी वसूली एजेंसी से करने का आदेश हुआ था। पहली किश्त के रूप में 10 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया है।
जल निगम के अफसरों ने भौतिक सत्यापन में दिसंबर तक एसटीपी की प्रगति महज 17 प्रतिशत बताई थी, जबकि अक्टूबर 2021 तक इसे पूर्ण करने का लक्ष्य है। कार्य की धीमी गति पर एजेंसी को जिम्मेदार मानते हुए 65 हजार रुपये प्रतिदिन की दर से कार्य सुचारु होने तक जुर्माना लगाया गया है। जल निगम के अधिशासी अभियंता एसके गुप्ता ने बताया कि पहली किश्त के रूप में एजेंसी से दस लाख रुपये जुर्माना वसूला गया है। एजेंसी की ओर से प्रस्तुत बिल से इस राशि की कटौती कर भुगतान किया गया है।