विश्वविद्यालय में हो रहा शासनादेश का उल्लंघन
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में संविदा शिक्षकों का सेवा विस्तार नहीं होने से शिक्षक संगठन भी आक्रोशित हैं। अनुदानित महाविद्यालय विश्वविद्यालय अनुमोदित शिक्षक संघ ने कुलाधिपति को पत्र लिखकर कहा है कि विश्वविद्यालय में शासनादेश का उल्लंघन किया जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. विजय प्रताप तिवारी ने बताया कि शासनादेश के अनुसार स्ववितपोषित पाठ्यक्रम के शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की सेवा संबंधित विषय के पाठ्यक्रम के चलते रहने अथवा संतोषजनक सेवा रहने तक जारी रहेगी।
शासन और उच्च न्यायालय के दबाव में राज्य विश्वविद्यालय की परिनियमावली में यह शासनादेश तो शामिल हो गया लेकिन शिक्षकों को प्रताड़ित करने के लिए राज्य विश्वविद्यालयों में पांच साल की संविदा नवीनीकरण को बरकरार रखा गया। प्रदेश अध्यक्ष ने कुलाधिपति से अनुरोध किया है कि वह कुलपति को इस मामले में निर्देश जारी करें।
30 जून को समाप्त हो गई है संविदा
काशी विद्यापीठ के मुख्य परिसर, गंगापुर और एनटीपीसी परिसर में कार्यरत 78 संविदा शिक्षकों की संविदा 30 जून को समाप्त हो चुकी है। वे पिछले पांच वर्ष से कार्यरत थे। एक जुलाई से उनका सेवा विस्तार होना चाहिए था। संविदा शिक्षकों के अनुसार वे पिछले चार महीने से बिना वेतन भुगतान के मौखिक आदेश पर वार्षिक व प्रवेश परीक्षाए ऑनलाइन क्लास और ई-कंटेंट के निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं।