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अध्यापकों में हिट हाई-वे का विद्यालय

Sun, 07 Feb 2016 02:17 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, वाराणसी
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प्रदेश में सरकारी शिक्षा व्यवस्था का हाल किसी से छुपा नहीं। उसके कारणों में अध्यापकों की तैनाती में अव्यवस्था और ‘खेल’... भी है! सर्व शिक्षा अभियान को सफल बनाने के लिए प्रदेश में हजारों टीचरों की भर्ती हुई। बावजूद, आज भी कई विद्यालयों में एक-एक अध्यापक के भरोसे बच्चों की पढ़ाई हो रही है। ऐसे में मिर्जामुराद जूनियर हाईस्कूल अन्य विद्यालयों को मुंह चिढ़ा रहा है।
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  ां कक्षा छह, सात और आठ में महज 176 बच्चों के लिए 18 अध्यापकों की तैनाती की गई है। ऐसे में हेडमास्टर के सामने विकट समस्या आ रही है कि किस-किस अध्यापक से बच्चों को पढ़वाएं। मानक की बात की जाए तो लगभग 30 बच्चों पर एक अध्यापक की तैनाती की जाती है लेकिन यहां पर किसी तरह के मानक का ख्याल नहीं रखा गया है। यह भी कोई बताने को तैयार नहीं कि आखिर नियमों-आदेशों को नजरंदाज करने के पीछे क्या कारण हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यालय हाईवे पर होने के चलते अधिकतर अध्यापकों की यहीं पर तैनाती की रुचि रहती है।

वो ऐनकेन प्रकारेण करा ही लेते हैं। कारण, महिला हो या पुरुष सभी बस से उतरते ही महज 100 मीटर की दूरी पर विद्यालय में चले जाते हैं। विद्यालय में वर्तमान में 12 महिला शिक्षक और छह पुरुष शिक्षक की तैनाती है। वहीं वर्तमान में बच्चों की संख्या पर नजर डालें तो यहां 176 बच्चे अभी शिक्षा ले रहे हैं। सबसे ज्यादा समस्या इस बात की आ रही है कि 18 अध्यापक हैं और महज तीन कक्षा, ऐसे में पंद्रह अध्यापक बैठे ही रहते हैं। सवाल उठता है कि जिले के कई ऐसे विद्यालय है जहां पर महज एक से दो अध्यापक ही विद्यालयों में तैनात हैं।
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 बच्चों को कोई पढ़ाने वाला तक नहीं है। ऐसे में यहां पर शिक्षकों को बैठाकर तनख्वाह देना किस हद तक सही है। उधर, विद्यालय की हेडमास्टर सविता तिवारी यह स्वीकारती हैं कि केंद्र पर आवश्यकता से ज्यादा अध्यापक तो हैं लेकिन इनकी तैनाती शासन-प्रशासन की ओर से की जाती है। इसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है।

19 साल में ...
उदाहरण: चोलापुर ब्लॉक के कैथोर पूर्व माध्यमिक विद्यालय की स्थापना 1996 में हुई थी। उस समय 10 बच्चों का प्रवेश था मगर आज 19 साल बीत जाने के बाद भी यहां 17 बच्चे ही पढ़ रहे हैं। इनमें से उपस्थिति हर रोज मात्र 10 से 11 छात्र ही आते हैं। वो भी कई बच्चों को घर से बुलाना पड़ता है। विद्यालय के शिक्षक जयकिशुन यादव ने बताया कि पहले यहां पहले दस बच्चे ही रजिस्टर्ड थे, 19 साल में 7 पंजीकरण पढ़े हैं।

शिक्षक बोले...
एक अभिभावक ने बताया कि मेरा बेटा तीन साल पढ़ा फिर भी उसे ककहरा, गिनती और एबीसीडी तक लिखनी नहीं आई। पिछले दिनों में निदेशक साक्षरता डॉ अवध नरेश शर्मा ने कई स्कूलों में बच्चों के शिक्षा के स्तर परखा, मगर उन्हें घोर निराशा हाथ लगी थी। चौथी-पांचवी के छात्र जोड़-घटाव के अति सामान्य नहीं कर सके, गिनती पहाड़ा तक नहीं सुना सके थे।
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