जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिक्षक पं. मुरलीधर
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…और धर्म और कर्म के दो योद्धा तैयार करने वाले शिक्षकों की कहानी
पहली कहानी जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिक्षक पं. मुरलीधर की
गुरु की मदद से जगद्गुरु ने कंठस्थ की थी भगवद गीता: जगद्गुरु रामभद्राचार्य किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। पद्म सम्मान से सम्मानित रामभद्राचार्य यूपी के जौनपुर के रहने वाले हैं। 73 वर्षीय जगद्गगुरु के गुरु हैं पं. मुरलीधर मिश्र। इन्हीं की मदद से पांच वर्ष की उम्र में मात्र 15 दिनों में सात सौ श्लोकों वाली संपूर्ण भगवद गीता रामभद्राचार्य जी ने कंठस्थ कर ली थी। करीब 100 वसंत देख चुके पं. मुरलीधर मिश्र उस समय की बात बताते-बताते कुछ-कुछ भूल जाते हैं। चेहरे पर अवस्था का प्रभाव साफ झलकता है। बहुत ज्यादा बोल तो नहीं पाते, लेकिन रामभद्राचार्य जी बचपन से ही कितने प्रतिभावान थे यह बताने के लिए उत्सुक रहते हैं। मुरलीधर मिश्र जौनपुर के सरायभोगी प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक थे और उस समय जगद्गुरु राम भद्राचार्य वहां आते थे। पंडित जी को भगवद गीता का अच्छा ज्ञान था। वह स्कूल खत्म होने के बाद भी बच्चों को धार्मिक ज्ञान देते थे। स्वामी रामभद्राचार्य भी इनके घर गीता पढ़ने जाया करते थे। पं. मुरलीधर अपनी कांपती हुई जुबां से बताते हैं कि जो बातें या श्लोक एक बार पढ़ा दिया जाता था, उसको गिरधर यानी रामभद्राचार्य को दोबारा बताने की जरूरत नहीं पड़ती थी। पिछले वर्ष जब रामभद्राचार्य जी अपने गांव शचीपुरम आए थे, तो पं.मुरलीधर मिश्र से मिले भी थे।
यूपी के चीफ सेक्रेटरी दुर्गाशंकर मिश्र के शिक्षक हरिहर शुक्ल
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दूसरी कहानी उप्र के चीफ सेक्रेटरी दुर्गाशंकर मिश्र के शिक्षक हरिहर शुक्ल की
चीफ सेक्रेटरी को अपने शिक्षक से मिला था दस पैसे का इनाम
प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र को गणित विषय पढ़ाने वाले शिक्षक हरिहर शुक्ल का कहते हैं कि दुर्गाशंकर में विलक्षण प्रतिभा है। उनकों दस पैसे इनाम भी दिया था। प्रदेश के सबसे बड़े प्रशासनिक पद पर आसीन मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र सन् 1971 में बलिया के लक्ष्मी राज देवी इंटर कॉलेज में कक्षा आठ में पढ़ने आए थे। हरिहर शुक्ल उन्हें गणित पढ़ाते थे। दुर्गाशंकर कक्षा में सवाल पूछने में सबसे आगे रहते थे। इतना ही नहीं प्रश्नों के उत्तर देने में भी वो ज्यादा समय नहीं लगाते थे।
शुक्ल कहते हैं, उनकी प्रतिभा का कायल होकर तब मैंने उन्हें दस पैसा (तब की धनराशि) बतौर पुरस्कार भी दिया था। शुक्ल बताते हैं कि पढ़ाई के दौरान कभी उन्हें डॉटने-पीटने की नौबत नहीं आई। अस्सी वर्षीय हरिहर शुक्ल 1964 से वर्ष 2007 तक लक्ष्मीराज देवी इंटर कॉलेज में बतौर एलटी ग्रेड अध्यापक के तौर पर कार्यरत रहे। 2022 में बलिया बलिदान दिवस पर सीएम के साथ चीफ सेक्रेटरी दुर्गाशंकर मिश्रा भी दो दिवसीय दौरे पर आए थे। बीस अगस्त को लक्ष्मीराज देवी इंटर काॅलेज में उनका कार्यक्रम था। उन्होंने हरिहर शुक्ल समेत अपने छात्र जीवन के गुरुजनों से मुलाकात की थी। उन कक्षाओं को देखा था, जहां उन्होंने कक्षा आठ में पढ़ाई की थी।