क्योटो में सीवर शोधित कर वहां की कामो नदी में छोड़ा जाता है। बुधवार को भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने 1939 में क्योटो में बनाए गए टोबा ट्रीटमेंट प्लांट का जायजा लिया। बताते चलें कि यह प्लांट बसंत ऋतु के दौरान आमजन के सैरसपाटे के लिए खोला जाता है। लोग यहां के लंबे चौड़े क्षेत्र में लगाए गए रंग बिरंगे फूलों को देखने और उनकी मनमोहक छटा कैमरे में कैद करने आते हैं।
जापान दौरे के तीसरे दिन महापौर रामगोपाल मोहले की अगुवाई में पांच सदस्यीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सुबह नौ से एक बजे तक टोबा सीवेज कांस्ट्रक्शन साइट का भ्रमण किया। महापौर ने ‘अमर उजाला’ को फोन पर बताया कि क्योटो में तीन ट्रीटमेंट प्लांट टोबा, किसहोइन और फुशिमी हैं। लगभग आठ दशक पुराने टोबा प्लांट का अधिकांश काम सौर उर्जा से होता है।
अत्याधुनिक तकनीक से लैस बेहद साफ सुथरा प्लांट परिसर और वहां काम करने का तरीके ने उन्हें बेहद प्रभावित किया। प्लांट में बताया गया कि फिलहाल क्योटो शहर में 50 साल पुरानी भूमिगत सीवेज पाइप लाइन काम कर रही है। इसमें खराबी की शिकायत मिलने पर तत्काल उसे दुरुस्त कराया जाता है क्योंकि सीवेज नेटवर्क का पूरा मानचित्र उपलब्ध है। अवैध तरीके से शहरवासी सीवेज कनेक्शन नहीं ले सकते हैं। इसी तरह से बारिश के पानी को भी शोधित किया जाता है और उसे संरक्षित करने के लिए विशाल टैंक बनाए गए हैं।