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पिछली गलतियों से लें सबक तो बने बात

Thu, 28 Apr 2016 01:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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पहले चरण में स्मार्ट सिटी की दौड़ से बाहर हो चुकी काशी अब दूसरे दौर के लिए कमर कस रही है। पहले चरण में नगर निगम की नाकामियों के चलते काशी पिछड़ गई थी। इतना ही नहीं सरकारी विभागों में आपसी सामंजस्य का अभाव होने की वजह से भी मुहिम को झटका लगा था। अब जबकि नए सिरे से दोबारा कवायद शुरू हुई है तो नगर निगम समेत इस मुहिम से जुड़े सभी विभागों को पिछली गलतियों से सबक लेना ही होगा।
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नगर निगम की ओर से चलाए गए स्वच्छता अभियान का फेल होना, कूड़ा निस्तारण का मुकम्मल इंतजाम न होना, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण और यातायात का कुशल प्रबंधन न होना, ऐसी वजहें रहीं जिनके चलते वाराणसी का स्मार्ट सिटी में चयन नहीं हो सका। वहीं, नगर निगम और संबंधित विभागों के साथ तालमेल तथा जन जागरूकता के अभाव के चलते शहर इस केंद्रीय योजना के लाभ से वंचित हो गया।



नगर निगम शहर को स्मार्ट शहरों की सूची में शामिल कराने के लिए सही तरीके से जनता के बीच स्मार्ट सिटी के विजन प्लान को नहीं रख सका और न ही जागरूक कर सका। जिसके चलते शहरियों की ओर से मिलने वाला बुनियादी सुविधाओं, जरूरतों के लिए अपेक्षित फीडबैक नहीं मिल सका। वहीं योजना का प्रचार-प्रसार भी सही तरीके से नहीं किया गया। नगर निगम प्रशासन और कार्ययोजना तैयार कर रही कंसलटेंट एजेंसी ने स्मार्ट सिटी के लिए जो फाइनेंशियल मॉडल तैयार किया था वह भी इस योजना में फिट नहीं बैठा। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी, वीडीए, पुलिस-प्रशासन, जलकल, जल निगम, गंगा प्रदूषण, बिजली विभाग आदि विभागों में आपसी सामंजस्य न होने से भी काशी की दावेदारी कमजोर हो गई। अबकि स्मार्ट सिटी के लिए संस्था बदलने के साथ ही पिछली गलतियों से सीख लेकर काम करने की तैयारी है। मुंबई की संस्था केपीएमजी एक मई से स्मार्ट सिटी पर काम शुरू करने जा रही है। 30 जून तक इसकी पूरी कार्ययोजना तैयार कर राज्य सरकार के माध्यम से इसे केंद्र को भेजा जाएगा।
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